नवगछिया में खेल मैदानों पर करोड़ों मंजूर

2020-25 के बीच चार खेल मैदानों के लिए मिला बजट, तीन योजनाएं अब भी अधूरी; खिलाड़ियों में बढ़ी निराशा

नवगछिया: नवगछिया अनुमंडल में खेल सुविधाओं के विकास और ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर मंच देने के उद्देश्य से वर्ष 2020 से 2025 के बीच करोड़ों रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गईं। लेकिन पांच वर्षों बाद भी अधिकांश परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। ‘सहयोग पोर्टल’ के माध्यम से प्राप्त जानकारी में जिला खेल पदाधिकारी, भागलपुर की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि अनुमंडल में स्वीकृत चार प्रमुख खेल मैदानों में से केवल एक का निर्माण पूरा हो सका है, जबकि तीन परियोजनाएं विभिन्न प्रशासनिक कारणों से अब भी अधर में लटकी हैं।

सिर्फ सैदपुर खेल मैदान हुआ तैयार

रिपोर्ट के अनुसार गोपालपुर प्रखंड स्थित उच्च विद्यालय सैदपुर में लगभग 1.21 करोड़ रुपये की लागत से खेल मैदान का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। यह नवगछिया अनुमंडल की इकलौती परियोजना है, जिसका लाभ अब स्थानीय खिलाड़ियों को मिल रहा है।

तीन परियोजनाएं वर्षों से अधूरी

आदर्श उच्च विद्यालय तुलसीपुर (खरीक): इस खेल मैदान पर अब तक करीब 22.69 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य केवल 65 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।

रंगरा चौक खेल मैदान: करीब 2.03 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना पर अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय विधायक के अनुरोध पर खेल मैदान का साइट परिवर्तन किया जा रहा है, जिसके कारण मामला कागजी प्रक्रिया में अटका हुआ है।

परवत्ता खेल मैदान (इस्माईलपुर): लगभग 2.19 करोड़ रुपये की इस परियोजना का निर्माण भूमि विवाद के कारण शुरू ही नहीं हो पाया। फिलहाल अंचल कार्यालय विवाद के समाधान और भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में जुटा है।

पहाड़पुर खेल मैदान (नारायणपुर): करीब 2.06 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना भी शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ सकी है। यहां अभी सीमांकन और कार्य आवंटन की प्रक्रिया ही चल रही है।

खेल सामग्री पर नहीं हुआ कोई खर्च

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए खेल सामग्री वितरण मद में एक भी रुपये का खर्च नहीं किया गया। हालांकि, अनुमंडल के 55 खेल मैदानों और ओपन जिम स्थलों के अधिष्ठापन पर 34.74 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख किया गया है।

खिलाड़ियों में बढ़ रही नाराजगी

करोड़ों रुपये की स्वीकृति के बावजूद परियोजनाओं के वर्षों तक अधूरे रहने से खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में निराशा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त खेल मैदान और आधुनिक सुविधाएं नहीं मिलने से ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि यदि भूमि विवाद और स्थल परिवर्तन जैसी समस्याओं का समय पर समाधान किया जाता, तो आज कई खेल मैदान तैयार होकर युवाओं के उपयोग में होते

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By न्यूज़ डेस्क

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