नवगछिया: इतिहास में ऐसे अनेक फैसले हुए हैं जिसके परिणाम के बारे में सटीक अंदाजा फैसला लेने वालों का भी नहीं रहा होगा. नोटबंदी का निर्णय कुछ-कुछ ऐसा ही है. अत्यंत कल्पनाशील व्यक्ति भी अभी भी इसके पूरे परिणाम के बारे में अनुमान नहीं लगा सकते. हालांकि संतोष की बात है कि अधिकांश से ज्यादे फल इसके सकारात्मक ही हैं. अगर सम्यक आलोचना करना चाहते हैं तो हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि दुनिया का कोई भी फैसला न ही हर व्यक्ति के फायदे के लिए हो सकता न ही हर व्यक्ति का नुकसान हो, यह ही संभव है. हर कदम में दोनों चीज़ें इनबिल्ट होती हैं. अच्छा या बुरा यह इससे साबित होता है कि लाभार्थी ज्यादे हैं या नुकसनार्थी. डीमोनेटाइजेशन के फैसले के इतने आयाम हैं कि इस पर दशकों तक शोध होता रहेगा. न केवल आर्थिक अपितु राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, मानवीय, आध्यात्मिक, मानसिक, आपराधिक, सामरिक ….. हज़ार पहलू हैं इसके, निश्चय ही ज्यादा से ज्यादा लाभ वाले ही. सुन्दर फैसला प्रधानमंत्री का !

लेखक: विक्रांत वैभव, छात्र नेता सह SYNSO छात्र संगठन के संस्थापक ऐवम् इंजिनीयरिंग काँलेज (कंम्पुटर साइंस) आईसेक्ट विश्वविघालय भोपाल के छात्र हैं


