मास्टर साहब पहले खुद पढ़ेंगे। फिर कक्षा में पढ़ाएंगे। राज्य सरकार ने शिक्षक शिक्षा संस्थानों में ‘फेस टू फेस’ कार्यक्रम चलाने का फैसला किया है। डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में बदलाव भी किया गया है। शिक्षा विभाग अब जिलों को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी करने जा रहा है।

शिक्षकों के कौशल ज्ञान पर जोर

केंद्र सरकार ने सुझाव दिया है कि शिक्षक छात्रों को जो विषय पढ़ा रहे हैं, उसके बारे में उन्हें पहले खुद पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। जानकारी रहेगी, तभी शिक्षक आनंद के साथ संबंधित विषय छात्रों को पढ़ा सकेंगे।

शिक्षकों से अपेक्षा की गई है कि वे बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उनकी जिज्ञासा का समाधान सटीक ढंग से कर सकें। यह व्यवस्था भी की जा रही कि शिक्षक ठीक से नहीं पढ़ा पा रहे, तो छात्र प्रश्नचिह्न भी लगा सकेंगे।

तैयार हुआ फेस टू फेस कार्यक्रम

शिक्षकों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने तथा उन्हें पढ़ाई की बदली तकनीक से अवगत कराने के लिए राज्य ने फेस टू फेस कार्यक्रम तैयार किया है। फेस टू फेस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षक पहले खुद बदला हुआ पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। पूरी तरह से प्रशिक्षित होकर स्कूलों में छात्रों को बेहतर तरीके शिक्षा देंगे।

नए शैक्षणिक सत्र से होगी व्यवस्था

शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने कहा है कि पाठ्यक्रम बदल रहा है तो पहले शिक्षकों को उससे अवगत होना होगा। इसलिए पूरी व्यवस्था की जा रही है। हमारा प्रयास है अप्रैल से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से इसे लागू किया जाए।

दो वर्षीय कोर्स के लिए तय  पाठ्यक्रम 

– समाज शिक्षा और पाठ्यक्रम

– बचपन और बाल विकास

– प्रारंभिक बाल अवस्था की देखभाल एवं शिक्षा

– भाषा की समझ, आरंभिक भाषा विकास

– पर्यावरण अध्ययन का शिक्षा शास्त्र

– कला समेकित शिक्षा, शिक्षा में सूचना एवं संचार क्रांति

– समकालीन भारतीय समाज में शिक्षा

– संज्ञान, सीखना और बाल विकास

– कार्य और शिक्षा

– स्वयं की समझ, स्वास्थ्य योग एवं शारीरिक शिक्षा

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By न्यूज़ डेस्क

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