नवगछिया : रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए लड़का लड़की में फर्क ना समझने वाले डॉ सीताराम की पुत्री ने परम्पराओं से ऊपर उठकर पिता के निधन पर उन्हें मुखाग्नि देकर अपने पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए समाज में एक संदेश दिया है कि मुखाग्नि का अधिकार सिर्फ पुत्र को ही नहीं है. पुत्री भी अपने माता पिता को मुखाग्नि देकर अपनी पित्रों को मुक्ति की साधना कर सकती है.


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,, डॉ सीताराम की पुत्री ने मुखाग्नि देकर अपने पिता की अंतिम इच्छा की पूरी

,, बेटा और बेटी में फर्क नहीं मानते थे डॉक्टर सीताराम

,, डॉ सीताराम ने अपनी दोनों पुत्री को पुत्र के समान दी थी शिक्षा दीक्षा

,, डॉक्टर सीताराम की हार्ट अटैक से हुई थी मौत

नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत गोपालपुर प्रखंड के पचगचिया गांव में ऐसा देखने को मिला. पचगछिया निवासी ग्रामीण डॉक्टर सीताराम से जो हमेशा से समाज में लड़का लड़की में कोई फर्क नहीं दोनों समान है. का अलख जगा रहे थे उन्हें दो पुत्री कुमारी श्वेता एवं सुप्रिया कुमारी थी. जिसे पुत्र के तरह शिक्षा दीक्षा देने का काम किया और दोनो पुत्री को इंजीनियरिंग कराया. शुक्रवार को एकाएक हार्ट अटैक आने से डॉ सीताराम सिंह का निधन हो गया.

उनके निधन के बाद उनकी बड़ी पुत्री कुमारी श्वेता ने उन्हें मुखाग्नि दी. सीताराम सिंह की भी यही इक्छा थी कि उनके निधन पर पुत्री उन्हें मुखाग्नि दी. ताकि समाज मे लड़का लड़की में भेद भाव करने वालों की आँख खुल सके. श्वेता ने कहा कि उनके पिता हमेशा मुझे पुत्र की तरह पालन पोषण किया है वह समाज में भी लड़का लड़की में कोई फर्क ना होने की बात हमेशा करते थे.

By Rishav Mishra Krishna

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