100 साल पुरानी जर्जर इमारत बनी खतरा, 2 अक्टूबर को गिरा उत्तरी हिस्सा; 1100 से अधिक बच्चे रोज गुजरते हैं
नारायणपुर। नारायणपुर प्रखंड के रायपुर गांव स्थित मध्य विद्यालय और +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में खड़ी करीब सौ साल पुरानी जर्जर इमारत अब बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती की छुट्टी के दिन अचानक भवन का उत्तरी हिस्सा भरभराकर गिर गया। संयोग से उस समय विद्यालय बंद था और बच्चे परिसर में मौजूद नहीं थे। ऐसे में बड़ा हादसा टल गया।
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भवन का हिस्सा गिरने के बाद से विद्यालय के छात्र, शिक्षक और अभिभावक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए या फिर इसे सुरक्षित तरीके से ध्वस्त कर परिसर से हटा दिया जाए।
अंग्रेजी शासन में कचहरी के रूप में होता था इस्तेमाल
स्थानीय लोगों के अनुसार, रायपुर का यह पुराना भवन करीब सौ साल से अधिक पुराना है। आजादी से पहले इसका इस्तेमाल अंग्रेजी शासन के दौरान कचहरी और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता था। आजादी के बाद 1949 में इसी भवन में प्राथमिक पाठशाला की शुरुआत हुई।

समय के साथ विद्यालय का विस्तार होता गया। वर्ष 2006 में इसे मध्य विद्यालय का दर्जा मिला, जबकि 2014 में +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय के रूप में इसे अपग्रेड किया गया। वर्तमान में विद्यालय में विज्ञान और कला संकाय की पढ़ाई भी होती है।
हालांकि, लंबे समय से रखरखाव के अभाव में भवन की स्थिति लगातार खराब होती गई और अब इसका एक हिस्सा गिर चुका है।
जर्जर भवन में बनता है बच्चों का मध्याह्न भोजन
स्थानीय ग्रामीण प्रमोद कुमार नागर के अनुसार, जर्जर भवन के एक हिस्से में वर्तमान में मध्य विद्यालय के बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। वहीं भवन के दक्षिणी हिस्से में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन होने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि जर्जर भवन के आसपास बच्चों और अन्य लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
मुख्य गेट के पास है जर्जर भवन
जर्जर भवन विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप स्थित है। मध्य विद्यालय और +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय में कुल मिलाकर 1100 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं।
मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील कुमार के अनुसार, उनके विद्यालय में करीब 600 बच्चे पढ़ते हैं। वहीं +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शंकर कुमार ने बताया कि कक्षा 10वीं से 12वीं तक कुल 528 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं।
विद्यालय खुलने के समय बड़ी संख्या में बच्चे, शिक्षक और अभिभावक इसी मुख्य द्वार से होकर परिसर में प्रवेश करते हैं। ऐसे में भवन का हिस्सा गिरने के बाद इसकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग की
भवन का उत्तरी हिस्सा गिरने के बाद ग्रामीणों और विद्यालय के शिक्षकों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे से पहले जर्जर भवन को सुरक्षित तरीके से हटाया जाना जरूरी है।
रायपुर पंचायत की मुखिया सिंधु शर्मा ने बताया कि भवन बेहद जर्जर स्थिति में है। उनके अनुसार, विभागीय अनुमति मिलने के बाद ही भवन को ध्वस्त करना उचित होगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षा समिति भी इस संबंध में तत्काल निर्णय ले सकती है।
वहीं, विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति के संबंध में शिक्षा विभाग को पहले ही पत्राचार के माध्यम से जानकारी दी जा चुकी है।
अब सवाल यह है कि भवन का एक हिस्सा गिरने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग इस खतरे को कितनी गंभीरता से लेते हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाते हैं।
सबसे बड़ी राहत यही रही कि भवन का हिस्सा छुट्टी के दिन गिरा। यदि विद्यालय संचालित होने के दौरान यह हादसा होता, तो स्
