नवगछिया। कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण रंगरा प्रखंड की पांच पंचायतें पिछले करीब 10 दिनों से बाढ़ की चपेट में हैं। मदरौनी, साहौड़ा, बनिया और कोसकीपुर समेत आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी फैलने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। गांवों के कई हिस्सों में पानी भर जाने से लोगों को रोजमर्रा के कामकाज और आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Total Downloads: 189
घरों और सड़कों पर जमा है बाढ़ का पानी
कोसी के जलस्तर में वृद्धि के बाद बाढ़ का पानी धीरे-धीरे गांवों के निचले इलाकों में फैल गया। कई ग्रामीणों के घरों के आसपास पानी जमा है, जबकि गांव की सड़कों पर भी पानी बह रहा है। स्थिति ऐसी है कि लोगों को जरूरी काम के लिए पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
बाढ़ के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पानी जमा रहने से संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

10 दिन बाद भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि दस दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। प्रभावित परिवार भोजन, शुद्ध पेयजल और पशुओं के लिए चारे की समस्या से जूझ रहे हैं।
सबसे बड़ी परेशानी आवागमन को लेकर है। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब जाने के कारण लोगों को आने-जाने के लिए नाव की जरूरत पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त नाव उपलब्ध नहीं होने से जरूरी काम के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
फसलों को भारी नुकसान की आशंका
बाढ़ का पानी खेतों में भी फैल गया है। लंबे समय से खेतों में पानी जमा रहने के कारण धान सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। किसानों को फसल बर्बाद होने के साथ आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि जलस्तर जल्द नहीं घटा तो फसलों के साथ-साथ पशुधन और घरों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी तत्काल राहत
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, शुद्ध पेयजल, नावों की पर्याप्त व्यवस्था और पशुओं के लिए चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित पंचायतों का तत्काल स्थल निरीक्षण करना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन कर जरूरत के अनुसार राहत उपलब्ध कराई जा सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कोसी नदी का जलस्तर जल्द कम नहीं हुआ और राहत कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की अपील की है।
