नवगछिया : रंगरा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत भगवती मैदान के प्रांगण में हो रहे तीन दिवसीय नव चंडी महायज्ञ के दौरान स्वामी आगमानंद जी ने कहा इस संसार में संतों का जन्म नहीं होता बल्की संतों का अवतरण होता है.
लोकमंगल कार्य के लिए, लोक कल्याण के लिए संतों का अवतरण होता है. अपने प्रवचन के दौरान स्वामी आगमानंद ने कहा वैदिक पद्धति में भक्ति मार्ग सबसे श्रेष्ठ है. जब मनुष्य के अंदर में शक्ति का अभिमान होता है तो व्यक्ति के अंदर रावण का अवतरण हो जाता है. व्यक्ति के अंदर का रावण मनुष्य को नाश की ओर लेकर जाता है. इसलिए मनुष्य को अभिमान नहीं रखना चाहिए. उन्होंने दुर्गा चरित्र कथा के दौरान कहां की मातृत्व की महत्ता शास्त्रों में भी वर्णित है. संसार में मातृभक्ति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. इसलिए शास्त्रों में माता सीता एवं मां दुर्गा को शक्ति रुप की संज्ञा दी गई है. माता दुर्गा की आराधना मात्र से मनुष्य का जीवन का कल्याण हो जाता है. इसके अलावा उन्होंने प्रवचन के दौरान साधना के बारे में बोलते हुए कहा कि सच्ची साधना अध्यात्म में आस्था होना आवश्यक है। सच्ची साधना से ही अध्यात्म की प्राप्ति होती है. आत्मा से परमात्मा के मिलन के लिए सच्ची साधना और निस्वार्थ भक्ति जरूरी है. उदाहरणस्वरूप राजघराने की मीरा जब भगवान श्रीकृष्ण की साधना में लीन हुई तो उन्हें लोगों द्वारा काफी प्रताड़ित किया गया. उन्हें इसके परिणाम स्वरुप विष दिया गया जो उनके लिए अमृत बन गया. और यही नहीं उनके गले में नाग डाला गया जो माला बन गया. उनकी सच्ची साधना की वजह से आत्मा से परमात्मा का मिलन हो गया. यज्ञ के तीसरे एवं अंतिम दिन इस मौके पर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति नलिनीकांत झा, हिंदी विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष नृपेंद्र वर्मा, भौतिकि विभाग के विभागाध्यक्ष जितेंद्र चौधरी ,कला केंद्र के पंडित शंकर मिश्र नाहर, मानस कोकिला कृष्ण की, पूर्व डीएसपी नवगछिया अरविंद कुमार मिश्रा, भजन गायक आचार्य शंभू नाथ वैदिक, पंडित कौशलेंद्र झा,के अलावा कार्यक्रम को सफल बनाने में बंटी झा, धर्मेश, दिवाकर ठाकुर, वरूण ठाकुर, कुंदन सिंह, शिव शक्ति योग पीठ के अध्यक्ष अनिमेष सिंह, कुमार साहब के अलावे अन्य हजारों श्रद्धालु मौजूद थे.

