बिहार में जब से शराबबंदी हुई है तब से शराब के चक्कर में एक साल में 44 हजार लोग जेल पहुँच गये है. अप्रैल 5 से लागू पूर्ण शराबबंदी के बाद मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के आंकड़ों के अनुसार शराब पीने के मामले में 44323 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.
मार्च 2017 के आखिर तक पुलिस और उत्पाद विभाग ने मिलकर 39869 मामले दर्ज किए और 44323 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.
घर-घर पहुंचाई जा रही शराब:
शराबबंदी के बाद अवैध तरीके से शराब का कारोबार खूब बढ़ा. बिहार के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने के काम में लगे लोगों की धरपकड़ में बड़ी मात्रा में देसी और विदेशी शराब की बोतलें बरामद हुई हैैं. उत्पाद विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक 307121 लीटर देसी शराब सूबे के विभिन्न हिस्सों से बरामद की गई. वहीं अंग्रेजी विदेशी शराब 511866.71 लीटर तथा बीयर की बरामदगी 1218224 लीटर हुई है. शराबबंदी के बाद से उत्पाद विभाग ने छापेमारी बढ़ा दी है. शराबबंदी लागू होने यानी अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक कुल 92314 छापेमारी हुई.

गाँव में बेअसर शराबबंदी:
शराबबंदी के बाद भी ज्यादा मात्रा में तो नहीं लेकिन कम भी पी रहे है तो पैसा उतना ही खर्च हो जा रहा है जितना में रोज पी सकते थे. चुकीं चोरी-छुपे मिली शराब की कीमत दुगनी से पांच गुनी तक होती है और पकड़ें जाने का भी डर रहता है इसके वावजूद लोग खर्च कर रहे है और पी रहे है. तक़रीबन हर जगह आसानी से लोग शराब पी रहे है यही कारण है कि ट्रक के ट्रक शराब पकड़ी भी जा रही है…

