नवगछिया :- रंगरा प्रखंड के सधुआ चापर में पिछले बुधवार से चल रहे अनुमंडलीय संतमत सत्संग के 46 वें वार्षिक अधिवेशन के दौरान समापन एवं अंतिम दिवस के अवसर पर प्रवचन करते हुए स्वामी वेदानंद जी महाराज ने कहा कि मानव को छल कपट और झूठ त्याग कर परमात्मा के दर्शन एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए संतो की शरण में जाना चाहिए. संत मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर जाने वाले मार्ग बताते हैं. भगवान राम ने भी शबरी से कहा था कि भक्ति के लिए संत की शरण में जाओ आगे उन्होंने कहा कि चेतन की धारा जब केंद्रित हो जाती है तो उसी समय सारी इंद्रिय सिमटकर बंद हो जाता है
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और उसी समय मानव को परमात्मा के दर्शन और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. इसी को वेदों में सार भक्ति की संज्ञा दी गई है वहीं दूसरी ओर स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने कहा कि कुदरत का बनाया हुआ यह मानव रूपी मंदिर में ही ईश्वर का वास है. मनुष्य के अंदर ही ईश्वर के रूप में दिव्य ज्योति प्रकाशित होती है.

इसके अलावा स्वामी योगानंद जी महाराज एवम श्यामसुंदर ब्रह्मचारी ने भी लोगों के बीच प्रवचन दीए. इस अवसर पर लगभग 50 हजार से भी अधिक सत्संग प्रेमियों ने संतों की अमृतवाणी रूपी जलधारा में गोता लगाया. प्रवचन के बाद संध्या आरती के साथ ही संतमत सत्संग का अनुमंडलीय 46वें अधिवेशन का समापन हो गया.

