शारदीय नवरात्र की तैयारियां तेज, 11 अक्टूबर से होगी कलश स्थापना; गज पर आएंगी मां दुर्गा
नवगछिया । आस्था और शक्ति की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। विभिन्न पूजा समितियों की ओर से पंडाल निर्माण, मंदिर परिसरों की सजावट और प्रकाश व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए बैठकों का दौर जारी है। मूर्तिकार भी मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
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इस वर्ष शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 11 अक्टूबर से होगा। इसी दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।
गज पर होगा मां दुर्गा का आगमन
पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन गज यानी हाथी पर होगा। देवी के वाहन को लेकर विभिन्न धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग फल बताए गए हैं।

पंचांग के जानकारों के अनुसार, गज पर देवी का आगमन अच्छी वर्षा, कृषि समृद्धि और आर्थिक खुशहाली का संकेत माना जाता है। हाथी को ज्ञान, वैभव, शांति और वर्षा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे कृषि उत्पादन बढ़ने और किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद की जाती है।
नवरात्र 2026 की प्रमुख तिथियां
- 11 अक्टूबर: कलश स्थापना एवं प्रतिपदा, मां शैलपुत्री की पूजा
- नवरात्र के दौरान: मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
- महाअष्टमी: मिथिला पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि दो दिन मान्य
- 20 अक्टूबर: विजयादशमी/दशहरा और नवरात्र का समापन
- माता का आगमन: गज (हाथी) — धार्मिक मान्यता के अनुसार सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत
- माता की विदाई: मुर्गा (चरणायुध) — धार्मिक मान्यताओं में इसे अशुभ फल से जोड़ा जाता है
मुर्गे पर विदाई को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं
पंचांग परंपरा के अनुसार इस वर्ष माता की विदाई मुर्गे (चरणायुध) पर होगी। धार्मिक मान्यताओं में देवी के इस वाहन को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसी मान्यताओं में इसे रोग, शोक, सामाजिक तनाव और अशांति से जोड़ा गया है।
कुछ पंचांग जानकारों के अनुसार, मुर्गे पर देवी के प्रस्थान को शासन-प्रशासन और सामाजिक व्यवस्था में उथल-पुथल से भी जोड़ा जाता है। हालांकि ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, इनके प्रभाव का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
किसानों के लिए गज पर आगमन को शुभ मान्यता
गज पर मां दुर्गा के आगमन को लेकर इस बार किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी सकारात्मक धार्मिक मान्यताएं चर्चा में हैं। हाथी को वर्षा और समृद्धि का प्रतीक मानते हुए पंचांग परंपरा में इसे अच्छी बारिश और बेहतर कृषि उत्पादन से जोड़ा जाता है।
खासकर खेती-किसानी पर निर्भर क्षेत्रों में नवरात्र के दौरान इस मान्यता को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा रहती है।
मंदिरों में प्रतिमा निर्माण का काम तेज
शारदीय नवरात्र को लेकर मुख्य बाजार के दुर्गा मंदिर, रेलवे दुर्गा मंदिर, सैदपुर और भमरपुर दुर्गा मंदिर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारियां तेज हो गई हैं। मूर्तिकार मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात जुटे हैं।
पूजा समितियां पंडाल निर्माण, बिजली और प्रकाश व्यवस्था, श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रही हैं।
अष्टमी की तिथि को लेकर पंचांग के अनुसार होगा निर्णय
पंडित दयानंद पाण्डेय ने बताया कि इस वर्ष मिथिला पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि दो दिन मान्य रहेगी। उन्होंने कहा कि नवरात्र के दौरान पूजा-अर्चना निर्धारित पंचांग और विधि-विधान के अनुसार की जाएगी।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार गज पर माता का आगमन राजा और प्रजा दोनों के लिए शुभ माना जाता है। वहीं मुर्गे पर विदाई को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।
नवरात्र के समापन के साथ 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर क्षेत्र के पूजा पंडालों और मंदिरों में तैयारियां लगातार जारी हैं।
