गोपालपुर : कई वर्षों के बाद बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा स्कूली छात्र छात्राओं के लिए अर्धवार्षिक परीक्षा आयोजित किये जाने के कारण शिक्षा व्यवस्था की कलई सामने आने लगी है. बताते चलें कि शिक्षा अधिकारी अधिनियम लागू होने के साथ ही स्कूली बच्चों के लिए स्कूलों में किये जाने वालीअद्घर्वाषिक व वार्षिक परीक्षा को समाप्त कर स्कूली शिक्षा में फेल करने की नीति को बंद कर सभी छात्रों को अगली कक्षा में अग्रसारित करने का निर्देश दिया. इसी के साथ स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था चरमरा गई. हालात ऐसे हो गये हैं कि आठवीं कक्षा के छात्र अपना नाम व पता भी नहीं लिख पा रहे हैं.
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मध्य विद्यालय आजमाबाद व उत्क्रमित मध्य विद्यालय आजमाबाद सहित दर्जनों विद्यालयों में ऐसी ही स्थिति दिखाई पडी.इस संदर्भ में अपना नाम नहीं छापने की शर्त्त पर शिक्षकों ने बताया कि पिछले दो साल से बच्चों को सरकार द्वारा पुस्तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. पाठ्यपुस्तकें बाजार में भी नहीं मिलती हैं. ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कैसे किया जा सकता है.

एमडीएम, जनगणना, पशु गणना, चुनाव संबंधी कार्य, शौचालय हेतु जनजागरण सहित सभी तरह के गैर शैक्षणिक कार्य शिक्षकों से कराते जाते हैं. शिक्षक संघ के अनिल कुमार अनल ने कहा कि वरीय अधिकारियों द्वारा प्रतिनियोजन के द्वारा भी शैक्षणिक व्यवस्था पर चोट पहुँचाया जाता है. आठ सौ छात्रों वाले स्कूल में मात्र पाँच शिक्षक हैं तो एक सौ छात्रों वाले स्कूलों में दस शिक्षक कार्यरत हैं.
क्या कहती है बीईओ रीता कुमारी मिश्रा
विद्यालय में पठन-पाठन गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिये यथोचित कदम उठाये जा रहे हैं. विद्यालयों का औंचक निरीक्षण कर व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त किया जा रहा है.

