शहर का पढ़ा-लिखा युवक आयुष। उम्र करीब 25 वर्ष। 2015 में पटना विवि से बीकॉम कर चुका है। हिंदी शार्ट हैंड भी जानता है। किसी ने कहा आईटीआई कर लो सरकारी नौकरी मिल जाएगी। उसने आईटीआई में भी प्रवेश ले लिया। आयुष हमें मिले नगर निगम सिटी अंचल में सफाईकर्मी की हो रही भर्ती में। एक तरफ बेरोजगारी दूसरी तरफ मां की दवाई, अब आयुष को समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। घर खर्च चलाने के लिए बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। ट्यूशन की फीस मां-बेटे की जरूरतों के लिए छोटी पड़ जा रही है। उसे पता चला कि नगर निगम द्वारा सफाई कर्मचारियों और मजदूरों की टॉस्क फोर्स की भर्ती की जा रही है। इसमें उसे 9,500 हर माह वेतन मिलेगा। उसने तत्काल आवेदन कर दिया और सिटी अंचल में लगी बेरोजगारों की कतार में आ खड़ा हुआ। सामान्य श्रेणी का आयुष जब आवेदन जमा करने पहुंचा तो उससे पहला सवाल यही किया गया कि तुम स्नातक हो नाली साफ कर लोगे ना? उसने मुस्करा कर जवाब दिया, साहब नौकरी चाहिए जो भी करना होगा कर लेंगे।
कम पढ़ा या ज्यादा, सबको मजदूर का काम
मजदूर वर्ग के कर्मियों की कमी को पूरा करने के लिए नगर निगम ने सभी अंचलों में एक-एक एजेंसी को भर्ती का काम सौंप रखा है। सिटी अंचल में चल रहे एवरेस्ट ह्यूमन रिसोर्स कंसल्टिंग के कर्मचारी ने बताया कि मजदूरों की भर्ती में शिक्षा और वर्ग के लिए कोई स्थान नहीं है। कम पढ़ा लिखा और उच्च शिक्षा हासिल कर्मचारी एकसमान ही काम करेगा। सभी कर्मचारियों को एकसमान वेतन दिया जाएगा। मुख्य काम नाला-नाली की सफाई, सड़क पर झाड़ू लगाने, अतिक्रमण हटाने और सड़क पर आवारा मवेशियों को पकड़ने का काम करना होगा।

ऐसे पूछे जा रहे सवाल
पटना सिटी में एवरेस्ट ह्यूमन रिसोर्स कंसल्टेंट एजेंसी द्वारा टास्क फोर्स के लिए किए जा रहे साक्षात्कार में विशेषज्ञों ने स्नातक किए हुए शंकर झा से कुछ इस तरह के सवाल पूछे कि आप भी चौंक जाएंगे।
एजेंसी-क्या तुम टास्क फोर्स में भर्ती होकर गाड़ी धोने का काम कर लोगे।
शंकर- हां।
एजेंसी-क्या सड़क पर मवेशियों को पकड़ लोगे।
शंकर- कर लूंगा सर
एजेंसी- बीकॉम पास हो नाला और नाली की सफाई कर पाओगे।
शंकर- नौकरी मिल जाएगी तो सब कुछ कर लेंगे।

पटना विवि से बीकॉम करने के बाद नौकरी की तलाश करता रहा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की। अब जरूरतें कह रही हैं कि जो भी नौकरी मिले कर लेनी चाहिए, चाहे सफाईकर्मी की ही क्यों न हो।
-आयुष कुमार, पटना
मगध विवि से 2015 में ही स्नातक किया है। आईटीआई भी किया है। 50 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाएं दे चुका हूं। लेकिन सफलता नहीं मिली। अब घर चलाना है तो सफाईकर्मी की नौकरी भी सही है।
-सोनू कुमार, गुलजार बाग
टास्क फोर्स के लिए जो भी भर्तियां चल रही हैं वह अस्थाई मजदूरों के रूप में हैं। इसके लिए एजेंसी से करार है। भर्ती में योग्यता और वर्ग के लिए कोई स्थान नहीं है। एजेंसी के माध्यम से लिए जाने वाले कर्मचारियों को नाला-नाली की सफाई से लेकर अतिक्रमण हटाने में सेवा देनी होगी।
-हर्षिता, पीआरओ पटना नगर निगम।
सफाईकर्मी पद के लिए भी मारामारी
बेरोजगारी का आलम यह है कि निगम के कुछ अंचलों में चल रहे टास्क फोर्स की भर्ती में सभी जाति वर्ग और व्यावसायिक, तकनीकी शिक्षा में दक्ष उम्मीदवार भी शामिल हो रहे हैं। इस कतार में एक आवेदक नॉन मैट्रिक है तो दूसरा बीए या एमए किया हुआ है। केवल युवक ही नहीं महिला उम्मीदवारों की भी लंबी कतार यहां लगी हुई है। बीकॉम उत्तीर्ण रेनू कुमारी से भी साक्षात्कार पैनल ने जब यह पूछा कि चिलचिलाती धूप में अतिक्त्रमण् हटवाने की टीम में शामिल हो सकेंगी, बैनर—पोस्टर हटवा पाएंगी तो उन्होंने ये सारे काम कर लेने का दावा किया। रेनू का कहना है कि एकबार नौकरी पा जाने के बाद धीरे—धीरे सब काम करने की आदत हो जाएगी।

मैंने इलेक्ट्रानिक कम्यूनिकेशन ब्रांच से बीटेक किया है। इस कोर्स को करने के बाद जब बिहार में कोई नौकरी नहीं मिली तो दिल्ली, मुंबई और इंदौर में भटका। हर जगह 10—12 हजार की नौकरी मिलती थी। थक हारकर पटना आया। अब टास्क फोर्स की भर्ती चल रही है तो नौकरी के लिए आया हूं।
-आदिल रशीद, गांधी मैदान
मगध विवि से बीएससी करने के बाद कुछ दिनों तक निजी कंपनी में नौकरी की। मैंने एक लाख रुपये खर्च करके डिप्लोमा इन कंप्यूटर साइंस में कोर्स किया है। लेकिन इस डिग्री का भी कोई महत्व नहीं रहा। अब घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नौकरी तो करनी है न।
-आलोक राज, खाजेकला
बीकॉम करने के बाद आईटीआई वेल्डर ट्रेड से किया। पिछले पांच वर्षों में हमने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया। पर बात नहीं बनी। ऐसे में नगर निगम में टॉस्क फोर्स के लिए मजदूर की नौकरी एक उपहार से कम नहीं है। बेरोजगारी के इस हालात में यही सहारा है।
-धीरज राज, सदर गली


