नवगछिया : अक्षय तृतीया पर 50 वर्ष बाद ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है जो अति शुभ फलदाई है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि इस बार तीन मई मंगलवार को पड़ रही है। अबूझ मुहूर्त को लेकर शहर के बाजारों में चमक-दमक बढ़ गई है। कोरोनाकाल से मुक्ति के बाद इस बार इस शुभ संयोग में लोग यहां पूजा-पाठ और दान-पुण्य करेंगे। वहीं, बड़े पैमाने पर खरीदारी भी होगी। शादी विवाह, यज्ञोपवित संस्कार सहित भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाएगी।
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ग्रहों की होगी ऐसी अनुकूलता
ज्योतिर्विद पं. दयानंद पाण्डेय ने बताया कि अक्षय तृतीया पर चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे। वहीं शनि स्वराशि कुंभ और बृहस्पति स्वराशि मीन में विराजमान रहेंगे। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चार ग्रहों का अनुकूल स्थिति में होना अपने आप में बहुत ही खास है। ऐसी स्थिति 50 वर्ष बाद बनी है। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं राजयोग के अलावा 30 वर्ष बाद मंगल रोहिणी नक्षत्र में अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। मंगल रोहिणी नक्षत्र के शोभन योग में है जो तैतिल करण और वृष राशि के चंद्रमा के साथ आ रही है। इस अवसर पर मंगलवार दिन और रोहिणी नक्षत्र के कारण मंगल रोहिणी योग बन रहा है। इस दिन शोभन योग अक्षय तृतीया को अति शुभ बना रहा है। यह संयोग 30 साल बाद बन रहा है।
इस दिन कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त देखे कर सकते हैं। शुभ संयोग और ग्रहों की विशेष स्थिति में अक्षय तृतीया पर दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन जल से भरे कलश पर फल रखकर दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु के छठें अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम जी का जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेनुका के घर हुआ था। इस दिन भगवान परशुराम की पूजा भी की जाती है। कुल मिलाकर यूं कहें कि इस बार अक्षय तृतीया अध्यात्मिक, व्यवसायिक और शुभ कार्यों का संगम होगा
