हॉरर किलिंग से निपटने के लिए बिहार के हर जिले में विशेष अदालत का गठन होगा। गृह विभाग ने हॉरर किलिंग पर एसओपी(स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर)जारी किया है। यह एसओपी सभी जिलों के एसपी को भेजा गया है। इसके तहत सभी जिलों में स्पेशल कोर्ट बनाया जाएगा। जहां त्वरित सुनवाई के जरिए जल्द फैसला कर दोषियों को सजा दी जाएगी।


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थानों को अज्ञात मिली लाश की सही तरीके से जांच कर त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। कमजोर वर्ग के एडीजी विनय कुमार ने बताया कि हॉरर किलिंग पर सात दिन पहले गृह विभाग से एसओपी जारी की गई है।

हत्या के एक फीसदी मामले हॉरर किलिंग के :

राज्य में हत्या के सालाना दो से ढाई हजार मामले दर्ज होते हैं। इसमें एक प्रतिशत हॉरर किलिंग से संबंधित होते हैं। हॉरर किलिंग के मामलों की सच्चाई का पता लगा पाना पुलिस के लिए काफी मुश्किल होता है। क्योंकि ऐसे मृतकों का पता नहीं लग पाता है। कई बार पुलिस वाले दूसरे पक्ष के प्रभाव में मामले को दबा देते हैं।

सात साल बाद पिता हुआ है गिरफ्तार :
सात साल पहले मोतिहारी में एक अज्ञात महिला की लाश मिली थी। पुलिस को पता नहीं चल पा रहा था कि आखिर महिला की हत्या कैसे हुई। पुलिस को मामले की सच्चाई लगाने में सात साल लगे। सात साल बाद पता चला कि पिता ने ही बेटी की हत्या कर मोतिहारी में फेंक दिया था। पिता को दरभंगा से गिरफ्तार किया गया।

By न्यूज़ डेस्क

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