अनंत चतुर्दशी व्रत एक सितंबर को है। इस दिन श्रद्धालु अनंत भगवान (विष्णु भगवान) की पूजा-अर्चना करने के बाद बाजू में अनंत सूत्र धारण करेंगे। इनमें 14 गांठ होते हैं। इस दिन मंदिरों व गंगा तटों पर अनंत व्रत की कथा सुनायेंगे। पंडित श्रीराम पाठक के बताया कि इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है।

भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल पांडव ने राज्य वापस पाने के लिए इस अनंत व्रत की कथी की थी। तब से अनंत पूजा की शुरुआत हुई। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुव:, स्व:, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी।

इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना जाता है। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस दिन भगवान विष्णु की लोक कथाएं सुनी जाती है।

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By न्यूज़ डेस्क

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