अगले महीने से त्योहारों का आगमन होने वाला है, लेकिन उससे पहले इसी महीने एक और बड़ा पर्व जितिया (Jitiya) मनाया जाएगा. जीवित्पुत्रिका व्रत (Jivitputrika Vrat) माताएं अपने बच्चों के लिए रखती है. इसे अश्विन मास (Ashwin maas) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाने की परंपरा है. ऐसे में इस वर्ष जितिया व्रत (Jitiya Vrat) इसी गुरुवार यानि 10 सितंबर को रखा जाएगा. इससे पहले 09 सितंबर को नहाय खाए होगा. आपको बता दें कि तीज की तरह ही यह भी निर्जला व्रत होता है. ऐसे में आइये जानते हैं इससे जुड़ी कुछ मान्यताएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट पंडित अजित पाण्डेय …


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जितिया व्रत पूजन विधि (Jitiya Vrat 2020, puja vidhi)

तीज और छठ पर्व की तरह जितिया व्रत की शुरूआत भी नहाय-खाय के साथ ही होती है. इस पर्व को तीन दिनों तक मनाये जाने की परंपरा है. सप्तमी तिथि को नहाय-खाय होती है. उसके बाद अष्टमी तिथि को महिलाएं बच्चों की उन्नति और आरोग्य रहने की मंगलकामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं. वहीं, तीसरे दिन अर्थात नवमी तिथि को व्रत को तोड़ा जाता है. जिसे पारण भी कहा जाता है.

व्रत का शुभ मुहूर्त (Jivitputrika Vrat 2020 Puja Muhurat)

पंडित अजित पाण्डेय की मानें तो जितिया व्रत 09 सितंबर को नहाय खाए होगा, गुरुवार यानि 10 सितंबर को व्रत रखा जाएगा. ११ सितम्बर को पारण होगा आपको बता दें कि तीज की तरह ही यह भी निर्जला व्रत होता है. ऐसे में आइये जानते हैं इससे जुड़ी कुछ मान्यताएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट पंडित अजित पाण्डेय …

जितिया व्रत पूजन विधि (Jitiya Vrat 2020, puja vidhi)

तीज और छठ पर्व की तरह जितिया व्रत की शुरूआत भी नहाय-खाय के साथ ही होती है. इस पर्व को तीन दिनों तक मनाये जाने की परंपरा है. सप्तमी तिथि को नहाय-खाय होती है. उसके बाद अष्टमी तिथि को महिलाएं बच्चों की उन्नति और आरोग्य रहने की मंगलकामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं. वहीं, तीसरे दिन अर्थात नवमी तिथि को व्रत को तोड़ा जाता है. जिसे पारण भी कहा जाता है.

व्रत का शुभ मुहूर्त (Jivitputrika Vrat 2020 Puja Muhurat)

पंडित अजित पाण्डेय की मानें तो जितिया व्रत इस वर्ष 10 सितंबर को पड़ रहा है. जिसका शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से शुरू हो जायेगा. जो अगले दिन यानि 11 सितंबर को 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. इस व्रत को पारण के द्वारा तोड़ा जाएगा जिसका शुभ समय 11 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक होगा.

जितिया व्रत से संबंधित मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं की मानें तो महाभारत के युद्ध के दौरान पिता की मौत होने से अश्वत्थामा को बहुत आघात पहुंचा था. वे क्रोधित होकर पांडवों के शिविर में घुस गए थे और वहां सो रहे पांच लोगों को पांडव समझकर मार डाला था. ऐसी मान्यता है कि वे सभी संतान द्रौपदी के थे. इस घटना के बाद अर्जुन ने अश्वत्थामा गिरफ्त में ले लिया और उनसे दिव्य मणि छीन ली थी. अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ में भी पल रहे बच्चे को मार डाला. ऐसे में अजन्मे बच्चे को श्री कृष्ण ने अपने दिव्य शक्ति से पुन: जीवित कर दिया. जिस बच्चे का नामांकरण जीवित्पुत्रिका के तौर पर किया गया. इसी के बाद से संतान की लंबी उम्र हेतु माताएं मंगल कामना करती हैं और हर साल जितिया व्रत को विधि-विधान से पूरा करती हैं.

जितिया व्रत से संबंधित मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं की मानें तो महाभारत के युद्ध के दौरान पिता की मौत होने से अश्वत्थामा को बहुत आघात पहुंचा था. वे क्रोधित होकर पांडवों के शिविर में घुस गए थे और वहां सो रहे पांच लोगों को पांडव समझकर मार डाला था. ऐसी मान्यता है कि वे सभी संतान द्रौपदी के थे. इस घटना के बाद अर्जुन ने अश्वत्थामा गिरफ्त में ले लिया और उनसे दिव्य मणि छीन ली थी. अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ में भी पल रहे बच्चे को मार डाला. ऐसे में अजन्मे बच्चे को श्री कृष्ण ने अपने दिव्य शक्ति से पुन: जीवित कर दिया. जिस बच्चे का नामांकरण जीवित्पुत्रिका के तौर पर किया गया. इसी के बाद से संतान की लंबी उम्र हेतु माताएं मंगल कामना करती हैं और हर साल जितिया व्रत को विधि-विधान से पूरा करती हैं.

By न्यूज़ डेस्क

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