बिहार सरकार सूबे के करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों के लिए जल्द ही नयी सौगात लेकर आने वाली है. वहीं शिक्षकों के साथ ही पुस्तकालयाध्यक्षों को भी अब नया तोहफा मिलने वाला है. सरकार पंचायती राज और नगर निकाय शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन में बढ़ोतरी करने जा रही है. उन्हें आगामी 1 अप्रैल से अब इस बढ़े हुए वेतन का फायदा मिल सकता है. शिक्षा विभाग इस तैयारी को असली जामा पहनाने में जुटा हुआ है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिहार का शिक्षा विभाग अभी बढ़े हुए वेतन के भुगतान के लिए वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में जुटा हुआ है. लगभग सारे काम पूरे हो चुके हैं और जल्द ही अब इसे संपन्न कर लिया जायेगा. विभाग में वेतन सारणी तैयार करने का काम जारी है और विधानसभा में बजट सत्र के समापन के बाद पंचायती राज और नगर निकाय शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के मूल वेतन में 15 फीसद की बढ़ोतरी निर्धारित कर लागू भी कर दी जायेगी.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वेतन सारणी तैयार होते ही शिक्षा विभाग इसके अनुरूप वेतन निर्धारण के लिए अधिसूचना जारी कर देगा. इस मामले को लेकर सरकार भी बेहद सक्रिय और गंभीर है. विभागीय स्तर पर इसे लेकर कई बैठकें हो चुकी है. दो बार की बैठकों में बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी भी शामिल रहे और वेतन बढ़ोतरी के लिए हो रही तैयारियों का उन्होंने जायजा भी लिया.

गौरतलब है कि सूबे के पंचायती राज और नगर निकाय शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन में बढ़ोतरी का फैसला सरकार स्तर से 18 अगस्त 2020 को लिया गया था. जिसमें इनके वेतन में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी तय की गयी थी. इस फैसले को पहले ही लागू कर दिया गया होता लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसमें विलंब हो गया.

एक अनुमान के तहत 1 अप्रैल से इस वेतन वृद्धि के कारण सरकार को करीब 1954 करोड़ सालाना अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ेगा. बता दें कि इससे पहले भी 2015 और 2017 में शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन में बढ़ोतरी की गयी थी. जिसमें क्रमश: 20 और 17 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी.

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By न्यूज़ डेस्क

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