कोरोना के लॉकडाउन से भले ही लोग परेशान हैं, लेकिन इसका असर अपराध पर भी पड़ा है। हत्या, लूट, दुष्कर्म जैसी घटनाओं में भारी कमी आई है। मुंगेर के डीआइजी मनु महाराज का दावा है कि 60 फीसद अपराध कम हुए हैं। शराब की तस्करी में भी कमी आई है।
बांका जैसे जिले में, जहां सड़क दुर्घटना में हर माह 15 से 20 लोग मरते थे, वहां जनता कफ्यरू और लॉकडाउन के दौरान किसी की दुर्घटना में मौत नहीं हुई है। लखीसराय जिले में अधिकांश मामले बालू और शराब की तस्करी को लेकर दर्ज किए जाते थे। यहां आपसी रंजिश में हत्याएं भी होती थीं, लेकिन बालू और शराब की तस्करी का एक भी मामला पिछले चार दिनों में दर्ज नहीं किया गया है। हां, बुधवार को राजेश कुमार नामक युवक की हत्या कर दी गई। मुंगेर में भी अपराध की घटनाओं में भारी कमी आई है।
इन चार दिनों के दौरान एक युवक को गोली मारकर जख्मी किया गया था। इसके अलावा अपराध की कोई बड़ी घटना नहीं घटी। बांका में चोरी की घटनाएं पहले अधिक होती थीं, लेकिन इस दौरान यहां के चोर भी अपराध का रास्ता भूल गए। बांका के एसपी अर¨वद गुप्ता का कहना है कि सबसे सुखद स्थिति तो यह है कि जनवरी में सड़क दुर्घटना में 18, फरवरी में 25 और मार्च में छह लोगों की मौत हुई थी। लॉकडाउन के बाद सड़क दुर्घटना की कोई घटना प्रतिवेदित नहीं हुई। नक्सल प्रभावित जमुई जिला भी इस दौरान पूरी तरह शांत रहा। उधर, कोसी के इलाके में भी शांति बनी रही। सहरसा में मारपीट के भले ही दो-तीन मामले दर्ज किए गए, लेकिन कोई अन्य घटना नहीं हुई।


सुपौल की भी कमोवेश यही स्थिति रही। मधेपुरा में भूमि विवाद को लेकर एक अधेड़ की मंगलवार को हत्या कर दी गई। अमूमन इन जिलों में प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए जाते थे। सीमांचल के चार जिलों कटिहार, किशनगंज, अररिया व पूर्णिया में भी अपराध की घटनाओं में भारी कमी आई है। कटिहार जिले के कुर्सेला थाना क्षेत्र में एक वाहन से लूट हुई है। वहीं, अररिया के कुर्साकांटा में बंधन बैंक के कर्मियों को लूटा गया और किशनगंज के बहादुरगंज में चचेरे भाइयों ने ही युवक की हत्या कर दी। इसके अलावा पूर्णिया में अपराध की कोई घटना नहीं हुई।
मुंगेर में अपराध की घटनाओं में साठ फीसद की कमी आई है। इस दौरान अवैध हथियारों के भी पकड़े जाने का कोई मामला सामने नहीं आया है।

