दरअसल बुधवार से बिहार की माताएं बेटों की लंबी उम्र, सुखमयी जीवन व आरोग्य बने रहने के लिए जितिया व्रत रखी हुई थी. जितिया पर्व के दौरान ही बेटों की दीर्घायु के लिए इस संदेश का असर इतना हुआ कि देखते ही देखते पूरा जिला इस अफवाह का शिकार हो गया और दुकानों के आगे लाइनें लग गयीं.


सीतामढ़ी में फैली इस अफवाह का आसपास के जिलों में भी प्रभाव देखा गया और कुल चार जिलों के लोग धरल्ले से Parle-G खरीदने लगे. लोग एक-दूसरे को बताने लगे कि घर में जितने भी बेटे हैं, उन सब को पारले जी खाना है, अन्यथा उनके साथ अनहोनी हो सकती है. इस अफवाह के कारण इन जिलों में दुकानों से पारले-जी बिस्किट गायब हो गया. लोग आनन-फानन में बिस्किट कर कालाबाजारी करने लगे.

बैरगनिया, ढेंग, नानपुर, डुमरा, बाजपट्टी, मेजरगंज समेत कई प्रखंडों में यह अफवाह आग की तरह फैला. इस अफवाह के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक अफरा-तफरी दिखी. हालांकि अब तक इस बात की जानकारी नहीं है कि यह अफवाह कब और किसने फैलायी.
पुलिस का कहना है कि इस अफवाह के कारण पारले कंपनी को मुनाफा हुआ है. मार्केट में पड़ा आधा स्टॉक एक दिन में खत्म हो गया. इस संबंध में कंपनी का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया.

