भागलपुर-आनंद विहार विक्रमशिला एक्सप्रेस इन दिनों घाटे की ट्रेन बन गई है। जमालपुर में सेंट्रल रूट रिले इंटरलॉकिंग काम को लेकर 20 से 29 सितंबर तक इसे साहेबगंज से धनबाद, गया होकर बदले रूट से चलाया जा रहा है। करीब 275 किलोमीटर ज्यादा सफर को लेकर काफी मात्रा में यात्रियों ने यात्रा ही रद्द कर दी। ऐसे में अब विक्रमशिला एक्सप्रेस से दिल्ली जाने और दिल्ली से इस ट्रेन के सहारे भागलपुर आने वाले यात्रियों की संख्या आधी हो गई है। इससे प्रतिदिन करीब एक लाख रुपये का घाटा रेलवे को उठाना पड़ रहा है।

200 लीटर डीजल की अतिरिक्त हो रही है खपत

करीब 275 किलोमीटर अधिक ट्रेन चलाने पर एक तरफ से करीब 55 लीटर अतिरिक्त डीजल की खपत हो रही है। पटना के रास्ते भागलपुर से आनंद विहार जाने की दूरी 1209 किमी है। जबकि डायवर्ट रूट से 1484 किमी सफर करना पड़ रहा है। 55 लीटर ज्यादा खपत दोनों ओर से है यानी 110 लीटर ज्यादा खपत। चूंकि विक्रमशिला एक्सप्रेस एलएचबी कोच युक्त है, ऐसे में इसमें दो जेनरेटर भी लगा होता है। जो उतनी ही तेल खपत करती है। कुल मिलाकर एक तरफ से दो सौ लीटर ज्यादा डीजल की खपत का बोझ उठाना पड़ रहा है।

सोमवार की शाम 4.27 बजे प्लेटफॉर्म संख्या दो पर साहेबगंज जाने वाली ट्रेन का यात्रियों ने ऐसे इंतजार किया। इस दौरान जान जोखिम में डालकर सैकड़ों यात्री पटरियों के पास खड़े हो गए। फोटो : शशि शंकर

स्थानीय अधिकारी कुछ बोलने से बच रहे

अधिकारी बताते हैं कि रेलवे का तीसरा घाटा मैन पावर कॉस्ट पर भी उठाना पड़ रहा है। आठ से दस घंटे का ज्यादा सफर के लिए ड्राइवर, गार्ड, टीटीई व अन्य मेंटेनेंस स्टाफ का वेतन कॉस्ट करीब चार लाख रुपये प्रतिदिन हो जाता है। सीधे तौर पर एक रैक पर पांच लाख रुपये का घाटा इस समय विक्रमशिला से रेलवे को उठाना पड़ रहा है। दस दिन तक यह घाटा 50 लाख रुपये हो रहा है। डिविजन को संभावित घाटे की जानकारी है। लेकिन रेलवे बोर्ड के आदेश पर डायवर्ट रूट से ही ट्रेन चलाने का आदेश है। ऐसे में लाेकल अधिकारी भी कुछ बात पाने से हिचकते हैं।

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By Rishav Mishra Krishna

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