कामधेनु गायों के बारे में आपने सुना होगा। पुराणों में, लोक कथाओं में कामधेनु गायों का जिक्र मिलता है। कहा जाता है कि कामधेनु गाय अपने पालक की इच्छानुसार दूध देती थी, साथ ही लोगों की इच्छा भी पूर्ण करनेवाली थी। ऐसी ही एक कामधेनु पटना में भी है। इच्छा पूर्ण करने की चाहत लेकर राज्य के कई बड़े अधिकारी भी इस गाय के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं। जब भी ये अधिकारी पटनदेवी मंदिर आते हैं, गौ माता का दर्शन जरूर करते हैं। पटना सिटी स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ बड़ी पटनदेवी मंदिर में ऐसी ही कामधेनु गाय है। मंदिर के महंत ने इसका नाम लक्ष्मी रखा है। लक्ष्मी ने मात्र एक साल की उम्र से दूध देना शुरू कर दिया था। अभी यह सात साल की है। छह साल से लगातार 10 से 12 किलो दूध दे रही है, वह भी बिना गर्भधारण किए हुए।
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बचपन से ही वह अन्य गायों से भिन्न नजर आती थी
मंदिर के पुजारी अरविंद जी और विकास कुमार गिरी ने बताया कि 2011 में लक्ष्मी को जन्म देते ही उसको जन्म देने वाली मां गुजर गई। उसके बाद उसका पालन पोषण महंत जी द्वारा अन्य गायों के साथ किया गया। बचपन से ही वह अन्य गायों से भिन्न नजर आती थी। एक साल होते ही लक्ष्मी के थनों से अपने आप दूध निकलना शुरू हो गया। महंतजी ने इसे देवी की इच्छा मानी। इसके दूध से बने खीर से ही देवी माता का पहला भोग लगता है।


भक्त खिलाते हैं केला और गुड़
बड़ी पटनदेवी मंदिर में सभी भक्तों को लक्ष्मी का दर्शन नहीं कराया जाता है। इसे मंदिर के पिछले हिस्से में रखा जाता है। पुजारी विकास कुमार गिरी ने बताया कि मंदिर के पुजारी ही इसकी सेवा करते हैं। गाय को केला और गुड़ नियमित रूप से खिलाया जाता है। यह केला इस कामधेनु के भक्त ही लाते हैं। भक्तों में बिहार के पूर्व डीजीपी से लेकर पटना के एसएसपी तक शामिल हैं। पटना की मेयर सीता साहू और उनका परिवार भी इनका बड़ा भक्त है। लोग इस गाय के समक्ष भी अपनी मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरा होने पर भक्त केला और गुड़ लाते हैं।

शक्ति उपासना का है केन्द्र :
पटना में स्थित पटन देवी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देवी भागवत और तंत्र चूड़ामणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी। नवरात्र के दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है। सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं। पटन देवी भी दो हैं- छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी, दोनों के अलग-अलग मंदिर हैं। पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी हैं जो छोटी पटन देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वर्णाभूषणों, छत्र व चंवर के साथ विद्यमान हैं। नवरात्र के दौरान महाष्टमी और नवमी को पटन देवी के दोनों मंदिरों में हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं।
सती के शरीर के हुए थे 51 खंड : मान्यता है कि महादेव के तांडव के दौरान सती के शरीर के 51 खंड हुए. ये अंग जहां-जहां गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ स्थापित की गई। यहां सती की दाहिनी जांघ गिरी थी। गुलजार बाग इलाके में स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर परिसर में काले पत्थर की बनी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमा स्थापित हैं।
