मधेपुरा के चौसा के बसैठा गांव निवासी पिंटू यादव के साढ़े तीन वर्षीय पुत्र आनंद कुमार को सर्दी-खांसी व बुखार होने पर गांव के कंपाउंडर अभिनंदन कुमार ने एक ऐसा इंजेक्शन दिया कि उसका दाहिना पैर ही नाकाम हो गया। जब बच्चे की स्थिति खराब होने लगी तो परिजनों ने उस कंपाउंडर को फोन किया पर उसने न फोन रिसीव किया न बच्चे को देखने आया।

इसके बाद परिजनों ने बच्चे को भागलपुर के तिलकामांझी स्थित फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. विनायक कुमार से दिखाया। उन्होंने आनंद को शिशु रोग विशेषज्ञ के पास रेफर कर दिया। परिजन आनंद को लेकर गुरुवार को शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नवजीवन के यहां पहुंचे। उन्होंने चेकअप होने के बाद शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉक्टर से जांच कराने की सलाह दी।

अस्पताल प्रबंधन ने जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी को इसकी जानकारी दी। उन्होंने अपनी टीम को भेज कर बच्चे की जांच कराई। टीम बच्चे का स्टूल टेस्ट करेगी। शनिवार को बच्चे को फिर जांच के लिए बुलाया है। सैंपल को लखनऊ या कोलकाता स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के लैब में भेजा जाएगा। ताकि यह पता चले कि बच्चे को पोलियो तो नहीं है।

डॉ. चौधरी ने बताया कि इस तरह की बीमारी में बच्चे का एएफटी यानि एक्यूट फ्लेसिड पारालाइसिस टेस्ट समय-समय पर कराया जाता है। खास तौर पर किसी बच्चे में पोलियो की आशंका होने पर स्टूल टेस्ट कराया जाता है। इसमें 10 तरह के अलग-अलग टेस्ट होते हैं। जिससे पता चलता है कि दवा देने के बाद क्या परेशानी हुई। इसके बाद इलाज शुरू किया जाता है।

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By Rishav Mishra Krishna

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