गंगा विहार का सपना पाले शहरवासियों के लिए एक बार फिर एक नई उम्मीद की किरण जगी है। गंगा में 24 सीटर बोट चलाने के लिए वन विभाग ने चौथी बार टेंडर जारी किया है। इसमें 4 अक्टूबर को टेंडर खोलने का समय तय हुआ है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो इस बार एजेंसी का चयन हो जाएगा और ठंड के मौसम में पर्यटकों को गंगा विहार करने का मौका मिल सकता है। साथ ही नजदीक से गंगा में अठखेलियां कर रहे डॉल्फिनों को नजदीक से देख पाएंगे। इससे इस इलाके में पर्यटन के क्षेत्र में भी एक नई संभावनाएं उभर सकती हैं।

फिलहाल यह बोट नीलकंठ घाट किनारे खड़ी है। इसका इस्तेमाल कभी-कभार अफसरों के घूमने-फिरने के लिए ही होता है। 3 जून 2016 को वन एवं पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने अफसरों को डॉल्फिन सेंचुरी को इको टूरिज्म में परिवर्तित करने का प्लान बनाने को कहा था। उन्होंने मुख्य वन संरक्षक को इस दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश दिया था, लेकिन जितनी तेजी से निर्देश दिया, इसमें उतनी ही देरी हो रही है।

नीलकंठ घाट पर खड़ी 24 सीटर बोट।

तकनीकी पेच फंसता गया

तत्कालीन डीएफओ संजय कुमार सिन्हा ने बेंगलुरु से बोट खरीदने का प्लान बनाया, एस्टीमेट भी बना, लेकिन बीच में मामला कीमत को लेकर अटक गया। करीब साल भर बाद बोट की खरीद हुई, लेकिन इसमें जीएसटी का चक्कर लग गया। जीएसटी का मामला फिट बैठा तो बोट को यहां तक पहुंचने में देरी हुई। इस बीच डीएफओ समेत अन्य अधिकारियों का तबादला हो गया।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

नाव में डॉल्फिन व पक्षियों के एक्सपर्ट रहेंगे और वे पर्यटकों को बताएंगे कहां क्या है। इसके लिए कुछ शुल्क भी निर्धारित किया जाएगा। करीब 60 किमी गंगा की यात्रा के दौरान पर्यटकों को भागलपुर से जुड़े अन्य इतिहास व पर्यावरण के बारे में बताया जाएगा। इससे डॉल्फिन के प्रति लोग जागरूक भी होंगे और उसकी सुरक्षा भी की जा सकेगी।

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By Rishav Mishra Krishna

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