नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा को समर्पित है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है नवरात्रि यानी नौ रातें। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि में जो भक्त मां आदिशक्ति की विधिवत पूजा करते हैं, ज्योतिसचार्य दयानंद पाण्डेय कहते है कि मां भगवती उनका कल्याण करती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं। जानें इस साल कब से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्रि, कलश स्थापना मुहूर्त, मां दुर्गा के वाहन व सबकुछ-
प्रतिपदा तिथि कब से कब तक: प्रतिपदा तिथि 14 अक्टूबर 2023 को रात 11 बजकर 24 मिनट से प्रारंभ होगी और 16 अक्टूबर2023 को सुबह 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में नवरात्रि का पहला दिन या प्रतिपदा तिथि 15 अक्टूबर 2023 को मान्य होगी।
कलश स्थापना या घटस्थापना का शुभ मुहूर्त: नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना की जाती है। इस साल नवरात्रि का पहला दिन 15 अक्टूबर को है। कलश स्थापना का उत्तम समय 15 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। घटस्थापना की कुल अवधि 46 मिनट की है।

घटस्थापना के दिन चित्रा नक्षत्र का संयोग: इस साल शारदीय नवरात्रि के पहले दिन चित्रा नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। कलश स्थापना वाले दिन चित्रा नक्षत्र 14 अक्टूबर 2023 को शाम 04 बजकर 24 मिनट पर प्रारंभ होगा और 15 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगा।
कलश स्थापना विधि-
1. अनाज बोने के लिए सबसे पहले मिट्टी का चौड़ा बर्तन लें। इसमें मिट्टी की एक परत फैलाएं और फिर अनाज के बीज फैलाएं। अगर जरूरी हो तो मिट्टी को सेट करने के लिए गमले में थोड़ा पानी डालें।
2. अब कलश की गर्दन पर पवित्र धागा बांधें और गर्दन तक पवित्र जल भरें। जल में सुपारी, गंध, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्के डालें। कलश को ढक्कन से ढकने से पहले कलश के किनारे पर अशोक के पांच पत्ते रखें।
3. अब बिना छिले नारियल को लें और इसे लाल कपड़े के अंदर लपेट लें। नारियल और लाल कपड़े को पवित्र धागे से बांध लें।
4. अब तैयार किए गए नारियल को कलश के ऊपर रखें। अंत में कलश को अनाज के बर्तन के बीच में रखें। अब हमारे पास देवी दुर्गा का आह्वान करने के लिए कलश तैयार है।
मां दुर्गा के आगमन व प्रस्थान के वाहन: शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा के आगमन का वाहन सिंह नहीं बल्कि हाथी है। जबकि मां मुर्गे पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी।

