जब जिंदगी की गाड़ी बेपटरी होने लगे तो बांका की रहने वाली प्रियंका के संघर्षों की कहानी से साहस और सीख मिलती है। प्रियंका मूलरूप से बिहार के बांका जिले की अमरपुर ब्लाॅक की रहने वाली हैं। 2002 में उनकी शादी भागलपुर के नवगछिया निवासी राजीव से हुई थी। गांव में आर्थिक तंगी बढ़ी तो दोनों पति-पत्नी दिल्ली के वजीरपुर में जाकर फैक्टरी में काम करने लगे। इसके बाद जीवन की गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर लौट आई।

लेकिन प्राबध्य को कुछ और मंजूर था। 2015 में पति की किडनी फेल हो गई। इलाज में घर की पुश्तैनी जमीन भी बिक गई। दो बच्चों की जिम्मेदारी अब प्रियंका के कंधों पर थी। अचानक आई इस मुसीबत से पार पाने के लिए उसे कुछ नहीं सूझ रहा था। एक तरफ पति का इलाज तो दूसरी तरफ बच्चों के लालन-पालन मुश्किल हो रहा था। लेकिन प्रियंका ने साहस का दामन नहीं छोड़ा और पैसेंजर गाड़ी की स्टीयरिंग थाम ली।

पहले तो ट्रांसपोर्ट कंपनी में बतौर हेल्पर बनकर तीन साल तक काम किया। फिर ट्रक चलाने का कौशल सीख लिया। प्रियंका को जिसने ट्रक चलानी सिखाई वे उसे आज भी वह उस्ताद ही बुलाती हैं। मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल कानपुर के प्रधानाध्यापक एसपी सिंह ने बताया कि प्रियंका के अंदर सीखने की ललक थी, जिससे उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई। पहली बार 27 महिलाओं का जब बैच शुरू हुआ तो प्रियंका उसे कभी-कभी लीड भी करती थी।

यूपी रोडवेज में महिला चालक बनकर हुई भर्ती

ट्रांसपोर्ट में नौकरी करने के दौरान प्रियंका को यूपी रोडवेज में महिला चालक की भर्ती व प्रशिक्षण का पता चला। उसने आवेदन दिया तो उसका चुनाव हो गया। इसके बाद प्रियंका ने कानपुर के मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से एलएमवी सहित 400 घंटे का भारी वाहन चलाने की ट्रेनिंग ली।

पति के इलाज में बिक गई पुश्तैनी जमीन

प्रियंका ने बताया कि पति के इलाज के लिए पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ी। 2020 में पति की मौत के बाद बच्चों को मायके लेकर आ गई। अच्छी शिक्षा के लिए दोनों का दाखिला भागलपुर के निजी स्कूल में कराया। फीस व अन्य खर्चों की पूर्ति के लिए रोडवेज की ट्रेनिंग के साथ गाजियाबाद के आसपास के जिलों तक वह भारी वाहन चलाने लगी। रोजाना पांच सौ से एक हजार रुपए मिल जाते हैं और उससे बच्चों की फीस जमा हो जाती है।

दूर-दराज गाड़ी ले जाने में अब नहीं लगता डर

पुरुषों के एकाधिकार वाले क्षेत्र में जब प्रियंका ने स्टेयरिंग थामी तो उसे हादसे का भय बना रहता था। बार-बार दोनों बच्चों का ख्याल आता था। लेकिन उसके कदम रुके नहीं। प्रियंका के साथ दो बार ऐसा भी समय आया जब बदमाशों ने ट्रक लूटने का प्रयास किया। लेकिन उसने अपनी सूझबूझ से इन चुनौतियों का सामना किया। प्रियंका ने बताया कि एक बार उदयपुर और दूसरी बार गुवाहाटी में ऐसी मुसीबत का सामना करना पड़ा था।

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By न्यूज़ डेस्क

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