नवगछिया अनुमंडल के किसानों को इस वर्ष भी दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। गंगा और कोसी नदी के बाढ़ से किसानों की फसल डूब कर बर्बाद हो गई थी। वहीं सितंबर में हुई मूसलाधार बारिश के बाद अनुमंडल के हजारों एकड़ खेतों में अब भी पानी है।
इससे किसान समय पर रबी की बुआई नहीं कर सकेंगे। अगर समय पर फसल की बुआई नहीं हुई तो दियारा के किसानों की स्थिति दयनीय हो जाएगी। सबसे खराब स्थिति इस्माइलपुर, गोपालपुर, बिहपुर और नारायणपुर के किसानों की है।
यहां के किसानों के खेत निचले क्षेत्र में है जहां अभी भी बाढ़ व बारिश का पानी जमा है। पिछले वर्ष भी किसानों को इस समस्या का सामना करना पड़ा था। लेकिन नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद खेतों से पानी निकल गया था। लेकिन इस बार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दी है। पानी की निकासी के लिए बिहपुर के जमींदारी बांध पर बने स्लुइस गेट को खोला भी गया था।
बावजूद खेतों में पानी जमा है। किसानों का कहना है कि अगर दस में खेत से पानी नहीं निकलता है तो रबी की बुआई नहीं कर पाएंगे। किसानों ने अनुमंडल प्रशासन से पानी की निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। किसान संघ के जिला संयोजक निरंजन चौधरी ने कहा कि जमींदारी बांध से अभी पानी नहीं निकल रहा है। यहां पंपिंग सेट से ही पानी की निकासी संभव है। इसके अलावा इस्माइलपुर गोपालपुर, खरीक प्रखंड में भी यही स्थिति है।

इस्माइलपुर और गोपालपुर की सड़कों पर भी जलजमाव
गोपालपुर और इस्माइलपुर में तो अब भी सड़कों पर जलजमाव है। दोनों प्रखंडों में 12 दिसंबर को पंचायत चुनाव को लेकर मतदान होना है। इस्माइलपुर के जफरू टोला में एक और डिमहा में दो बूथ हैं। लेकिन इन तीनों बूथों पर जाने के लिए रास्ता नहीं है। ऐसे में मतदाताओं को दिक्कत होगी। यहां बाढ़ में बांध ध्वस्त हो गया था। प्रशासन द्वारा रास्ता बनाने की कवायद की जा रही है। मगर अब तक काम पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा डिमहा, मालपुर, लक्ष्मीपुर सहित कई गांवों में जलजमाव है। यहां अब भी लोग घरों की छतों पर रहने के लिए विवश हैं।
इस्माइलपुर प्रखंड के डिमहा में सड़क पर जमा बारिश का पानी।

