नवगछिया : महाराष्ट्र के ठाणे में पानी टंकी पर कार्य करने के दौरान करंट लगने से जयमंगल टोला के तीन युवा मजदूरों की मौत के बाद गांव में सन्नाटा छाया है। हर तरफ महिलाओं की करुण चीत्कार के साथ पुरुषों की सिसकियां माहौल गमगीन हो गया है। गांव मे इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे हैं वे बी युवकों की मौत पर दुखी हैं। शुक्रवार को गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले।

इकलौते बेटे की मौत से माता-पिता बेसुध

इकलौते पुत्र शालिग्राम की मौत से पिता सिताबी मंडल बेसुध पड़े हैं। वे बार-बार बेटे को याद कर सिसक सिसक कर रो रहे हैं। वहीं मां झूमा देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। वह रोते रोते बेहोश हो जाती थी तो परिवार के लोग पानी का छींटा मारकर उसे होश में लाते थे।

अब कौन करेगा बहन की शादी

शालिग्राम परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। जिसपर मां, विकलांग पिता सहित दो-दो बहनों मंगली और नीलम के शादी और भरण पोषण का जिम्मा था। दो बहनों स्मिता सुलेखा की शादी हो गयी थी। शालिग्राम की मौत ने परिवार के सदस्यों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी कर दी। एक बहन मंगली शादी के योग्य है जिसकी शादी हाल में ही होनी थी। इसके लिए पैसा जमा करने ठाणे गया था। मां कह रही है अबे केय करतै हमरो बेटी के ब्याह अरु अबै की ख्यबै हो बाबू, केना जीबै ,हमरो बाबू चलो गेलै। परिवार लोगो के चीख पुकार से लोगो की आंखे भी हम हो गयी।

विकलांग पिता ने पकड़ी खाट

ठाणे में करंट से राजन की मौत के बाद परिवार पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है। पुत्र की मौत की खबर सुनकर विकलांग पिता लखन मंडल ने रोते-रोते खाट पकड़ ली है। वहीं मां सुदामा देवी का भी रो-रो कर बुरा हाल है। उनके तीन लड़के सोनेलाल, रूपम और राजन ठाणे में ही काम करते थे। मां ने रोते हुए बताया कि सभी यज्ञ में घर आये थे और होली के बाद वापस गये थे।

गुलशन की मौत से परिवार पर विपत्ति

गुलशन की मौत से परिवार पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है। गुलशन पर दो भाई गरीब मंडल और बिद्यानंद के अलावे विधवा बहन प्रियंका और उसके बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी थी। आठ माह पूर्व प्रियंका के पति की मौत के बाद वह भी यही आकर रह रही थी। वह भाड़े पर टैंपो चलाकर परिवार का भरण पोषण करता था लेकिन दलाल उसे फुसलकर महाराष्ट्र लेकर चला गया और परिवार पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। गुलशन की मौत पर मा सहित बहनें फूट-फूट कर रो रही थी।

दो दर्जन लड़के पूना में

जयमंगल टोला के दो दर्जन से अधिक युवा और नाबालिग परिवार के दो जून की रोटी के लिए महाराष्ट्र में काम कर रहे है। इन सबको वहां कुर्सेला मजदिया का ठेकेदार कमीशन पर ले जाकर कंपनी में काम दिलवाता है। लोगों ने बताया कि यहां जो बोलकर ले जाता है वहां वह उतना पैसा नहीं दिलवाता है और काम अध्यक्ष करवाता है। जोखिम भरे काम के कारण अक्सर लड़के मौत के आगोश में सोते हैं।

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By न्यूज़ डेस्क

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