नवगछिया : घाट ठाकुरबाड़ी में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन मंगलवार को प्रयागराज से आए कथा वाचक स्वामी विनोदानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में कहा कि माता-पिता से बड़ा कोई देवता नहीं है। यदि आप जीवन में सुख चाहते हैं, तो कभी भी उन्हें दुख का अनुभव न होने दें। जिस परिवार में माता-पिता दुखी होते हैं, वहां कभी भी समृद्धि नहीं आती।

ऐसा व्यक्ति जिसकी माँ-बाप खुश न हों, वह मंदिर जाकर क्या लाभ प्राप्त करेगा? उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि जो राम का नाम लेते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का भय नहीं होता। दूसरों की भलाई की प्रार्थना करें, लेकिन किसी के लिए बुराई की इच्छा न करें। राम कथा सुनने से शरीर और मन दोनों पवित्र होते हैं, यह कथा रूपी गंगा हमें पार कराती है।

भगवान हर जगह हैं, बस हमें उनके प्रति आस्था और विश्वास आवश्यक है। प्रवचन के दौरान उन्होंने कुछ भजनों की पेशकश की जिनमें “बड़ा दुख पाया प्रभु जी चरणों को छोड़ के, बड़ा दुख पाया, प्रभु जी चले आओ दौड़ के” शामिल थे, जिससे रामभक्त झूमने लगे।

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By न्यूज़ डेस्क

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