बिहपुर। यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित ओओ बोगो मोलेट यूनिवर्सिटी में मेडिकल की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही झंडापुर वार्ड नंबर दो निवासी सुरेंद्र कुंवर उर्फ सुनील कुंवर की पुत्री तनीषा कुमारी गुरुवार को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से दिल्ली आनेवाली फ्लाइट पकड़ चुकी हैं। एक-दो दिन में तनीषा के घर पहुंच जाने की उम्मीद है।
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तनीषा के पिता सुनील कुंवर के चहरे पर चिंता साफ देखी जा रही थी। उन्होंने बताया की तनीषा तीन बहनों में सबसे बड़ी है। वह 2017 से ही कीव में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। वह फाइनल वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। तनीषा अपनी एक सहेली के साथ बड़ी मुश्किल से बुडापेस्ट पहुंची थी। वह गुरुवार को बस से एयरपोर्ट को निकली थी। हम लगातार बेटी से संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को ही इस बाबत नवगछिया एसडीओ यतेंद्र कुमार पाल से मिलाकर सारी वस्तुस्थिति से अवगत कराया था। उन्होंने कहा मेरी बेटी सुरक्षित है। ज्ञात हो कि यूक्रेन में मेडिकल पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का हब बन गया है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारतीय मेडिकल छात्रों का वतन लौटने का सिलसिला जारी है।
यूक्रेन में फंसा इस्माईलपुर का राहुल पहुंचा हंगरी
नवगछिया। इस्माईलपुर प्रखंड के छोटी परबत्ता निवासी मुकेश कुमार दास का पुत्र राहुल कुमार यूक्रेन में मेडिकल पढ़ने के लिए गया था। जहां पर वह इन दिनों फंसा हुआ था। गुरुवार को वह यूक्रेन की सीमावर्ती क्षेत्र हंगरी पहुंच गया जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली है।

परिजनों का कहना है कि हंगरी सुरक्षित पहुंचने के कारण हमलोगों को राहत मिली है। राहुल के पिता मुकेश कुमार दास ने बताया कि बड़ी उम्मीद से डॉक्टरी पढ़ने के लिए इकलौते पुत्र राहुल को यूक्रेन भेजा था। जहां पर 2 वर्ष पूर्व कीव यूनिवर्सिटी में उसका नामांकन हुआ था। कोरोना के कारण पिछले 2 वर्षों से पढ़ाई बाधित थी। इधर कॉलेज खुला तो जंग शुरू हो गयी। जिससे मेरे पुत्र का सपना अधूरा रह गया है। वह किसी तरह देश वापस आ जाए यही हमलोगों चाहते हैं। उन्होंने बताया कि हमलोग काफी प्रयास और उम्मीद से उसे मेडिकल में नामांकन कराकर विदेश भेजे थे लेकिन इस जंग ने हमारे व पुत्र के सपनों को पानी फिरता दिख रहा है। मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनता और लोगों की सेवा करता। अब न तो वह पूरी पढ़ाई पर पाया और न ही और कुछ होने जैसा लग रहा है।
