नवगछिया में दीपावली और छठ पर्व को लेकर स्थानीय कलाकारों द्वारा मंजूषा पेंटिंग दीये, कलश में उकेरा जा रहा है। 4 नवंबर को दीपावली है जिसके लिए अभी से ही मंजूषा पेंटिंग से रंगे दीये और कलश बाजार सहित कुम्हार पट्टी में दिखने लगे हैं। वहीं आस्था के महापर्व 10 नवंबर को है। इस महापर्व में बांस के सूप और दउरा का बहुत महत्व है। व्रती इसमें ठेकुआ, फल-फूल व अन्य पूजन सामग्री रखकर अर्घ्य देती हैं। बदलते ट्रेंड के साथ अब सूप व दउरा पर भी नयापन का रंग चढ़ता जा रहा है।


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इस बार छठ को लेकर सूप एवं दउरा को भी मंजूषा पेंटिंग से सजाया जा रहा है। मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप, भागलपुर भी भेजे जाएंगे, जहां मंजूषा से जुड़ी हर चीज लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इस कला से जुड़ीं महिलाएं बांस के सूप के दोनों ओर मंजूषा पेंटिंग में भगवान सूर्यदेव और कलश की तस्वीरें उकेर रही हैं। दउरा पर भी मंजूषा की पेंटिंग की कलाकारी लोगों का दिल जीत रहा है। इस तरह के सूप की कीमत बाजार में 150 रुपये से 250 रुपए तक है। मुकेश राणा मंजूषा पेंटिंग के लिए स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और उनके बनाएं समान को बाजार में उपलब्ध करा रहें हैं।


कलाकारों ने कहा-दो साल से मंजूषा पेटिंग से सजे सूप की मांग बढ़ी है

मंजूषा कलाकार खुशी श्री बताती हैं कि इस बार बड़ी संख्या में लोग मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप की ओर आकर्षित हुए हैं। मेरे साथ करीब चार-पांच महिलाएं इससे जुड़ी हुई हैं। पिछले दो साल से इस तरह के सूप की मांग बढ़ी है। नवगछिया के कुम्हार पट्टी एवं मनसा सदन के पास इसे तैयार किया जा रहा है। गोवर्धन पंडित, विक्की पंडित, राजनंदिनी, संगीता सोनी व मंजू ने बताया कि पिछले साल से मंजूषा पेंटिंग से जुड़ी हुई हूं। अगर बेहतर प्रशिक्षण मिले तो हमारे हुनर को भी पहचान मिल सकती है। इसमें परिवार का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। अधिक से अधिक लोगों तक मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप पहुंच सके, इसकी कोशिश की जा रही है।

By न्यूज़ डेस्क

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