नवगछिया – नवगछिया में अवैध रूप से नाव का परिचालन कोई बड़ी बात नहीं है. तटवर्ती इलाके के लोग रोजाना जिंदगी की तलाश में मौत के साथ खिलवाड़ करते हैं. तटवर्ती इलाके के किसी भी गांव की 60 फीसदी आबादी खेती और खेतों में मेहनत मजदूरी पर निर्भर है. गंगा तट हो या को कोसी तट नवगछिया अनुमंडल के सैकड़ों लोग रोजाना नदी के पार जाकर या तो अपने खेतों में काम करते हैं या फिर दूसरे के खेत में मेहनत मजदूरी. अब वे किस तरह नदिया पार जाते हैं इसकी जानकारी जिम्मेदार लोगों को नहीं है.
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यहां तक कह जा रहा है कि दर्शन मांझी ट्रेक्टर तक नाव से पार करा देते हैं. दर्शनिया घाट पर नाव पर सवार अधिकांश महिलाएं और लड़कियां 12 सीट बहियार मकई की बोने करने जा रही थी तो दूध विक्रेता दूध का संग्रह करने जा रहे थे. टीनटेंगा गांव के कई किसान ऐसे भी हैं जिसने 12 सीट में अपना बासा बना कर पशुपालन और खेती करते हैं. ऐसे लोगों के लिये रोज उसके घर से महिलाएं खाना के कर 12 सीट जाती हैं.

अगर यह लोग रोजाना नदी पार कर 12 सीट दियारा नहीं जाएंगे तो 2 जून की रोटी का जुगाड़ होना मुश्किल है. ऐसे में जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि उनके लिए आवागमन की मुकम्मल व्यवस्था कर दी जाए. सवाल सिर्फ दर्शनिया घाट का नहीं बल्कि नवगछिया अनुमंडल के 50 से अधिक अवैध रूप से संचालित हो रहे घाटों की भी है जहां से लोग रोजाना दो जून की रोटी तलाश करने नदिया पार जाते हैं.

