पंचायताें में याेजनाओ के नाम पर मुखिया, सचिव, एजेंसी से लेकर बीडीओ तक की मिलीभगत से लाखाें का घपला हाे रहा है। ताजा मामला खरीक प्रखंड की ढाेढ़िया दादपुर पंचायत का है। यहां याेजनाओं में भारी अनियमितता बरती गई और करीब 32 लाख से ज्यादा का घोटाला किया गया। इसका खुलासा डीअारडीए डायरेक्टर की जांच रिपाेर्ट से हुआ है। अब पूर्व मुखिया व तीन एजेंसियाें पर एफआईआर हाेगी। रिपाेर्ट में पाया गया कि वैसी एजेंसियाें से स्ट्रीट लाइट खरीदी गई, जाे अस्तित्व में ही नहीं है। इसके लिए बाजार से दाेगुनी कीमत दिए गए।

चापाकल लगाने की याेजना नहीं हाेने के बाद भी इसे उसी एजेंसी से खरीदा गया। मुखिया काे दाे लाख रुपए तक का ही वित्तीय अधिकार है, फिर भी उस वक्त के मुखिया और सचिव ने मिलकर करीब 32 लाख रुपए से अधिक खर्च कर डाले। इस पर पंचायत के बैंक खाता पर राेक लगाने के लिए बीडीओकाे सक्षम प्राधिकार से अनुमति लेनी हाेती है। लेकिन पूर्व बीडीओ ने भी बिना उनकी अनुमति के बैंक खाता पर राेक लगाते और हटाते रहे और इसका फायदा मुखिया और एजेंसी काे मिलता रहा।

डीआरडीए डायरेक्टर ने की थी मामले की जांच -इस पूरे मामले की जांच भी तब की गई, जब नवगछिया के अनुमंडलीय लाेक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश के खिलाफ डीएम सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार में खुद फर्जी एजेंसी के संचालक ने केस किया। सुनवाई के दाैरान डीआरडीए डायरेक्टर से मामले की जांच कराई गई और इसमें नवगछिया अनुमंडलीय लाेक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश काे सही पाया गया। एजेंसी के संचालक नीरज निरंजन के केस काे रिजेक्ट कर दिया गया।

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By न्यूज़ डेस्क

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