नवगछिया : रंगरा प्रखंड के तिनटंगा दियारा ( उत्तर )पंचायत अंतर्गत ज्ञानी दास टोला में लगातार एक सप्ताह से हो रहा भीषण कटाव बदस्तूर जारी है. दिनोंदिन कटाव की रफ्तार काफी तेज होती जा रही है. बीते एक सप्ताह के दौरान अब तक एक दर्जन से भी अधिक घर कटाव की भेंट चढ़ चुका है। पिछले एक माह पूर्व जलस्तर घटने के साथ ही लोगों ने राहत की सांस ली थी. मगर 5 दिन पूर्व से गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही तीव्र वृद्धि के कारण कटाव का रफ्तार तेज हो गया है. पिछले शुक्रवार को महादलित परिवार का पांच घर देखते ही देखते पल भर में गंगा नदी में समा गया. 2 घंटे के अंदर पांच घर नदी में समाने के बाद ग्रामीणों के बीच हड़कंप मच गया और आनन-फानन में कटाव के मुहाने पर अवस्थित लगभग दो दर्जन परिवारों ने अपना घर खाली कर अन्यत्र पलायन कर गए.

पंचायत के अस्तित्व पर संकट

लगातार तीन वर्षों से हो रहे कटाव के फल स्वरुप दियारा क्षेत्र की खासकर तिनटंगा दियारा (उत्तर) पंचायत की एक बड़ी आबादी प्रभावित हुई है. पिछले वर्ष से लेकर अब तक लगभग 200 घर कटाव की भेंट चढ़ चुका है. इन 200 घरों के 10000 की आबादी कटाव से विस्थापित होकर यहां से पलायन कर चुकी है. पंचायत के पूर्व मुखिया भोला मंडल ने बताया है कि पंचायत का आधा हिस्सा खत्म हो चुका है. अब आधा हिस्सा ही बचा हुआ है. अगर कटाव का रफ्तार इसी तरह रहा तो अगले पंद्रह दिनो में तिनटंगा दियारा पंचायत का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा.

वर्ष 20 21 में 3 करोड़ की लागत से जल संसाधन विभाग द्वारा कराया गया था कटाव निरोधी कार्य

पंचायत के मुखिया गणेशी मंडल ने कहा कि 2 वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर कटाव से गांव को बचाने की गुहार लगाई थी. मुख्यमंत्री ने गांव को बचाने का आश्वासन दिया था और तत्काल ही विभाग को कटाव निरोधी कार्य करवाने का निर्देश दिया था. पिछले वर्ष 20 21 में जल संसाधन विभाग के द्वारा 3 करोड़ की लागत से कटाव निरोधी कार्य करवाया गया था. इसके बावजूद भी गांव को नहीं बचाया जा सका. इस पर ग्रामीण विनोद मंडल, सुभाष गुप्ता, मदन मोहन मिश्रा, शिक्षक सुभाष चन्द्र दास आदि ने जलसंसाधन विभाग पर कटाव निरोधी कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से ठेकेदार ने यहां कार्य का सिर्फ खानापूर्ति कर यहां से चले गए और जनता का सारा पैसा लूट लिया.

जानवर की जिंदगी जीने को विवश हैं कटाव पीड़ित

कटाव पीड़ितों को अब तक स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है. जिससे कि कटाव पिडीत अपनी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है. लिहाजा अपना सब कुछ गवा चुके कटाव पीडीत अपने परिवार के साथ खुले आसमान के नीचे धूप और वर्षा में जानवर की जिंदगी जीने को विवश हैं. कटाव से विस्थापित परिवारों के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा ना तो रहने की व्यवस्था की गई है ना ही खाने पीने की. जिसके फलस्वरूप कटाव पीड़ितों के बीच स्थानीय प्रशासन के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है.

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By न्यूज़ डेस्क

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