सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना। मशहूर लेखक पाश की ये पंक्तियां पूर्णिया के संतोष शिवम पर सटीक बैठती है। हम जीवन भर सपने और वास्तविकता के बीच जूझते हैं। जो सपनों पर काबू कर लेता है, वही बनता है ‘ड्रीम कैचर’। पूर्णिया के भूरी गांव के रहने वाले संतोष इंडो-ऑस्ट्रेलियाई बैनर के तहत बनने वाली शॉर्ट फिल्म “ड्रीम कैचर” से बतौर डायरेक्टर डेब्यू कर रहे हैं।
संतोष कहते हैं इस फिल्म का कॉन्सेप्ट पूरी तरह नया है। ड्रीम कैचर में यह दिखाया जाएगा कि कैसे आप अपने सपनों को काबू में कर सकते हैं। फिल्म में हर किरदार का अपना सपना है और वो उसे पूरा करने की जद्दोजहद में लगा रहता है। 20 मिनट की यह शॉर्ट फिल्म ऑस्कर को ध्यान में रख कर बनाई जा रही है। इसकी शूटिंग पहले सिडनी में होनी थी लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार की वीजा पाबंदी के बाद संतोष ने फिल्म की शूटिंग देश में ही करने का फैसला किया। शूटिंग अभी इन दिनों गुड़गांव में चल रही है। फिल्म में ऑस्ट्रेलियाई सुपर स्टार लिंकन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। जबकि 2016 की मिस वर्ल्ड फिजी रहीं पूजा प्रियंका हीरोइन की भूमिका में है। फिल्म में बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र को छोड़ ज्यादातर कलाकार हॉलीवुड से हैं।

परििस्थतियों ने डायरेक्टर बना डाला
करीब 17 साल पहले पूर्णिया से संतोष एक्टर बनने मुंबई पहुंचे। बाद में वो फिल्म प्रोडक्शन और तकनीक से जुड़ गए। संतोष बताते हैं कि साल 1993-94 में पूर्णिया में थिएटर से जुड़ गए थे। उन दिनों एनएसडी की टीम पूर्णिया आई थी। अखिलेश खन्ना व आलोक चटर्जी जैसे थिएटर के मंझे हुए अभिनेताओं के साथ काम किया।
यमला-पगला-दीवाना, अंकुर अरोड़ा मर्डर केस समेत कई फिल्मों में किया काम
संतोष बताते हैं कि एक किसान का बेटा फिल्म इंडस्ट्री में अपना कैरियर बनाए ऐसा सोचना भी गुनाह माना जाता था। फैमिली की स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी बैकअप मिले। पापा गांव में रह कर खेती करते हैं। एक भाई है जो माेबाइल दुकान चलाता है। इस दौरान छोटे-मोट प्रोजेक्ट करता रहा। कुछ फिल्में भी मिलीं। इनमें यमला-पगला-दीवाना पार्ट-1, लाल सलाम, एक से बुरे दो, अंकुरा अरोड़ा मर्डर केस शामिल हैं।


