नवगछिया।उत्तर में कोसी, दक्षिण में गंगा और पश्चिम में बूढ़ी गंडक नदी से घिरा बिहपुर विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से जितना समृद्ध है, उतना ही राजनीतिक रूप से सक्रिय भी रहा है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही यह क्षेत्र राजनीतिक चेतना का केंद्र माना जाता है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो भागलपुर जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक 73.18 प्रतिशत मतदान 1969 में इसी बिहपुर में हुआ था। उस दौर में सीपीआई नेता प्रभु नारायण राय की लोकप्रियता काफी थी — वे साइकिल पर बैठकर और हाथ में भोंपू लेकर चुनाव प्रचार करते थे। उन्होंने 1957, 1969 और 1972 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई के प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी।
1957 से 1990 तक के चुनावों में कांग्रेस और सीपीआई दोनों को चार-चार बार सफलता मिली। 1967 में जनसंघ ने भी यहां एक बार जीत दर्ज की थी। लेकिन 1990 के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1990 से 2020 के बीच हुए आठ चुनावों में दो बार जनता दल, तीन बार राजद और दो बार भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इसके बावजूद बिहपुर की तकदीर और तस्वीर आज भी नहीं बदली।

बता दें कि बिहपुर विधानसभा क्षेत्र में बिहपुर, खरीक और नारायणपुर प्रखंड शामिल हैं, जो वर्तमान में नवगछिया अनुमंडल के अंतर्गत आते हैं। आज़ादी के बाद 1951 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र का नाम नवगछिया सह बिहपुर था। 1957 के दूसरे चुनाव से लेकर अब तक यह क्षेत्र बिहपुर विधानसभा के नाम से जाना जाता है।

