बिहार में करोड़ों की लागत से कोई पुल सरकार बनाती है लेकिन वो पुल उद्घाटन तक नहीं टिक पाता है और ढह जाता है. पुल का धाराशायी होना अब आम हो चुका है. अभी खगड़िया-सुल्तानगंज के बीच गंगा पर बन रहे अगुवानी पुल का बड़ा हिस्सा गिरने का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल प्रखंड में बूढ़ी गंडक पर बना उच्चस्तरीय आरसीसी पुल उद्धाटन से पहले ही शनिवार की देर रात धाराशायी हो गया.
हाल में ही अगुवानी पुल के 36 स्लैब गिरे
भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा पर बन रहे अगुवानी पुल के चालू होने का इंतजार सबों को है. इस पुल के बन जाने से बड़ी आबादी लाभांवित होगी. खगड़िया व भागलपुर के बीच पूरे 60 किलोमीटर की दूरी घटेगी. लेकिन यह पुल तैयार होने के पहले ही भ्रष्टाचार के पूरे खेल को सामने दिखा गया. हाल में ही पुल के 36 स्लैब गिर गये.
पुल ढहने की वजह जानकर चौंक गये नितिन गड़करी
वहीं जब अगुवानी पुल के ढहने पर दलील दी गयी कि तेज आंधी से पुल का हिस्सा गिर गया तो केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी तक चौंक गये थे. करीब 1716 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल ने निर्माण के दौरान ही भ्रष्टाचार की झलक दिखा दी.

अगुवानी पुल का चैप्टर अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि बेगूसराय में बूढ़ी गंडक नदी पर बन रहे पुल का हिस्सा धाराशायी हो गया. इस पुल का निर्माण मुख्यमंत्री नाबार्ड योजना के तहत ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से कराया गया था. निर्माण के तीन वर्षों के अंदर ही पुल टूटकर गिर गया. जबकि लंबे समय की मांग के बाद लोगों को ये पुल मिला था. जल्द ही इसका उद्घाटन होना था. एप्रोच पथ पर पुलिया नहीं बनने की वजह से इसका उद्घाटन टला था.
सहरसा में भी गिर चुका है पुल
बताते चलें कि सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड अंतर्गत पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर एक निर्माणाधीन पुल भी इसी साल ढहा. बेगूसराय में गिरे पुल के बारे में ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि ठेकेदार ने 32की जगह 10 एमएम का ही छड़ लगा दिया. जबकि लाल बालू की बचत करने उजले बालू का इस्तेमाल किया.

