पूर्व घोषित आंदोलन के तहत जिलेभर के ढाई हजार से अधिक संविदाकर्मी मंगलवार से तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर चले गए। इस आंदोलन में जिले भर के तमाम दफ्तरों के कार्यपालक सहायक हैं। कर्मियों के हड़ताल से कई आवश्यक सेवाएं चरमरा गई हैं।
प्रखंड कार्यालय से लेकर पंचायतस्तर तक के कार्यालयों में बुधवार को ताला लटका रहा। सबसे व्यस्त रहने वाला आरटीपीएस काउंटर पर भी पूरी तरह सन्नाटा दिखा। प्रखंड और अंचल कार्यालय के डाटा और कंप्यूटर ऑपरेटिंग रूम नहीं खुले। अधिकारियों को ऑफलाइन ही सारा काम निपटाना पड़ा। बिजली ऑफिस में भी कामकाज बाधित रहा।

ना किसी को कनेक्शन मिल पाया और ना ही बिजली बिल जनरेट हो सका। बिजली बिल जमा कराने आए लोगों को भी बैरंग वापस लौटना पड़ा। यह स्थिति 3 सितंबर तक बनी रहेगी। आंदोलनकारियों ने मांगे पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की चेतावनी दी है।
ये सेवाएं प्रभावित
तीन दिवसीय अवकाश के कारण आमजनों से जुड़ी दर्जनों सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गई है। कृषि विभाग में किसानों से जुड़ी सेवाएं बाधित हो गई। आरटीपीएस काउंटर में ताला लटका रहा और जाति, आवासीय, आय, आदि प्रमाण पत्र की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित है।
2018 में सौंपे गए रिपोर्ट को लागू करे सरकार
कार्यपालक सहायक सेवा संघ के नेताओं ने बताया कि संघ के आह्वान पर तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2018 में गठित उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपा गया है। बावजूद सरकार की ओर से कार्यपालक सहायकों की मांग की अनदेखी की गई।


