बिहार कैबिनेट की बैठक से नई शिक्षक नियमावली के पास होने के बाद इस पर सवाल उठने लगे हैं। लोग बिहार विधान सभा चुनाव से पहले के तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी और अखिलेश प्रसाद सिंह की पार्टी कांग्रेस के वादे को याद कर रहे हैं। याद इसलिए कर रहे हैं कि नियोजित शिक्षक यह मान रहे हैं कि उनके साथ छल किया जा रहा है।

दूसरी तरफ महागठबंधन के अंदर ही नई शिक्षक नियमावली को लेकर अलग-अलग राय है। भाकपा माले ने इस पर अपना विरोध जताया है। माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि हमारी मांग है कि ‘नियोजित शिक्षकों के पूर्ण समायोजन के साथ पुराने शिक्षकों की भांति सेवा शर्त और वेतनमान दिया जाए।’

माले विधायक संदीप सौरभ ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है ‘शिक्षक संघों से बातचीत करके सरकार को यह नियमावली लानी चाहिए थी। शुरुआत में मीटिंग की गई थी। मुझसे भी सलाह ली गई थी लेकिन बीपीएससी से परीक्षा ली जाएगी ये बात नहीं की गई थी। सरकार को नियमावली पर पुनर्विचार करना चाहिए। नियोजित शिक्षकों के बीच जो संशय की स्थिति है उसे सरकार को दूर करना चाहिए और अगली परीक्षा जल्द से जल्द ली जानी चाहिए।’

वे कहते हैं कि सरकार ने जो कंडिशन लगाया है उसको लेकर विरोध हो रहा है। यह भी समझने वाली बात है कि 17 साल में जो नियोजन प्रक्रिया चली उसमें खामियां रहीं। हमलोग इसको लेकर 15 अप्रैल को मीटिंग कर रहे हैं जिसमें शिक्षक संघ के नेताओं के साथ-साथ शिक्षक भी रहेंगे। नियमावली से जिस तरह का मैसेज जा रहा है, उससे जुड़े कन्फ्यूजन को सरकार को साफ करना चाहिए। सरकार 15 दिनों के अंदर बहाली से जुड़ी विज्ञप्ति निकाल देगी।

लगभग तीन लाख नियोजित शिक्षकों में गुस्सा इस तरह है कि नियोजित शिक्षक संघ का मन हड़ताल की तरफ बढ़ रहा है। सरकार ने जल्द इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया या पुनर्विचार नहीं किया तो जाति आधारित गणना पर ग्रहण लगना तय है।

प्रोफेसर चंद्रशेखर ने ट्वीट किया था…

बिहार में शिक्षा विभाग आरजेडी के पास है। मंत्री हैं आरजेडी के मधेपुरा विधायक प्रोफेसर चंद्रशेखर। चंद्रशेखर ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी थी कि उन्होंने नई शिक्षक नियमावली पर हस्ताक्षर कर दिया है। यह जल्द कैबिनेट में जाएगी। बजट सत्र जब खत्म हो गया तब सरकार इसे कैबिनेट में ले आई। इस बीच यह बात आती रही कि इसको लेकर जेडीयू और आरजेडी के बीच क्रेडिट लेने की होड़ रही है।

तेजस्वी ने राजद के घोषणा पत्र में ये बड़े वायदे किए थे

– शिक्षकों के लिए समान काम समान वेतन का वादा। – नियोजित शिक्षकों, वेतनमान कार्यपालक सहायकों, लाइब्रेरियन उर्दू शिक्षकों की बहाली की जाएगी। – बिहार के बेरोजगार युवाओं को 10 लाख नौकरी देने का वादा। – जिन बेरोजगार युवाओं को नौकरी नहीं मिल पाई उन्हें 1500 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का वादा। – सरकारी नौकरियों में आवेदन फॉर्म भरने के लिए बिहार के युवाओं को आवेदन शुल्क नहीं देना होगा और परीक्षा केंद्र तक की यात्रा मुफ्त होगी। – संविदा प्रथा को खत्‍म कर सभी कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा और समान काम का समान वेतन दिया जाएगा। – सभी विभागों में निजीकरण को समाप्त किया जाएगा। – जीविका कैडरों को नियमित वेतनमान पर स्थायी नौकरी के साथ समूहों के सदस्यों को ब्याज मुक्त ऋण देंगे। – सरकारी नौकरियों के 85 प्रतिशत पद बिहार के युवाओं के लिए आरक्षित करने का वादा । – पुरानी पेंशन शुरू की जाएगी। – किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।

तेजस्वी का कोर वोट बैंक शिक्षक रहे हैं

विधान सभा चुनाव के बाद तेजस्वी यादव ने राबड़ी देवी के आवास में प्रेस कांफ्रेस कर आरोप लगाया था कि 20 सीटों पर कुछ-कुछ सीटों से उम्मीदवारों को हरवा दिया गया। नौ-नौ सौ पोस्टल वोट रद्द कर दिए गए। दावा यह भी किया था कि पोस्टल वोट में ज्यादातर वोट शिक्षकों के थे। तेजस्वी यादव छठे चरण के लिए हुए आंदोलन में अभ्यर्थियों के साथ सड़क पर भी उतरे थे।

पटना के ईको पार्क की सभा को संबोधित किया था और वहां से पटना डीएम को फोन किया था। इसके बाद वे ईको पार्क से गर्दनीबाद धरना स्थल तक पैदल गए थे। अब नियुक्त उन्हीं नियोजित शिक्षकों के अंदर नई शिक्षक नियमावली से उथल-पुथल की स्थिति है। वे आंदोलन की राह पर हैं।

शिक्षक संघ ने कहा- जल्द सभी एकजुट होकर संघर्ष शुरू करेंगे

टीईटी-एसटीईटी बिहार नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक और प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पांडेय ने कहा है कि नियोजित शिक्षकों को निराशा हाथ लगी है। बिहार सरकार ने बीपीएससी के माध्यम परीक्षा आयोजित कर बहाली करने का निर्णय लिया है और नई नियमावली से पहले ही कार्यरत नियोजित शिक्षकों को भी अलग थलग रखा है।

कहा है कि सरकार ने एक बार फिर से नई नियमावली लाकर यह स्पष्ट कर दिया कि वह शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के भांति वेतनमान और सेवा शर्त देने के मूड में नहीं है और अपने चुनावी वायदे से मुकरते हुए पूर्व से कार्यरत शिक्षकों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं करके शिक्षकों को छला है। अब सरकार एक ही विद्यालय में वह अलग अलग तरह के शिक्षकों को बहाल करके विद्यालयों में विद्वेषपूर्ण माहौल बनाना चाहती है। वहीं बीपीएससी से परीक्षा लेने के बाद भी शिक्षकों को नियमित शिक्षक के भांति वेतनमान और सेवा शर्त की व्यवस्था नहीं की है और न ही इस बात की चर्चा की है कि उन्हें कौन सा वेतनमान देगी? वर्षो से सीटीईटी, बीटीईटी और एसटीईटी की परीक्षा पास करके बहाली का इंतजार कर रहे शिक्षकों के घर में भी सरकार के इस निर्णय से सूनापन है।

कहा कि बिहार के तमाम शिक्षक और शिक्षक अभ्यर्थी सरकार के इस नियमावली से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। नियोजित शिक्षकों को पूर्ण समायोजन के साथ पुराने शिक्षकों की भांति सेवा शर्त और वेतनमान से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। अपनी मांगों को लेकर जल्द ही सभी शिक्षक संगठनों को एकजुट कर संघर्ष का शंखनाद किया जाएगा।

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By न्यूज़ डेस्क

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