भागलपुर से विदाई के समय भावुक हुए डीआईजी विकास वैभव। शुक्रवार रात स्थानीय एक होटल में विदाई समारोह के मौके पर उन्होंने कहा कि स्थानांतरण एक प्रक्रिया है। ऐसे मौके पर मन भावुक होना स्वाभाविक है। किसी स्थान पर लंबे समय तक रहने पर लोगों से जुड़ाव हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि पूर्व से ही एटीएस में जाना चाहता था। पहले एनआईए दिल्ली में था लेकिन बिहार एटीएस के गठन में मुझे भी बुलाया गया था। कुछ काम मन में है जिसे एटीएस में पूरा करूंगा। अधिकारियों ने बुके भेंटकर और माला पहनाकर उन्हें विदाई दी। इस मौके पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडे, जिलाधिकारी प्रणव कुमार, एसएसपी आशीष भारती और नवगछिया एसपी निधि रानी ने भी विचार रखे। सभी ने डीआईजी के कार्यकाल की प्रशांसा की।

डीआईजी ने कहा कि पुलिसिंग की शुरुआत भागलपुर से ही हुई थी। डीआईजी में प्रोन्नति के बाद भागलपुर में पहली पोस्टिंग हुई। यहां भी 32 महीने का लंबा कार्यकाल रहा। सेवाकाल के दौरान लोग मिलने आने लगे। मिलने से लोगों का विश्वास बढ़ा। सूचनाएं आमलोगों से ही मिलने लगीं। उन्होंने कहा कि भागलपुर ऐतिहासिक जगह है। विक्रमशिला तिब्बत के इतिहास से जुड़ा है। यह भगवान बुद्ध और चंपा का भी क्षेत्र है। भागलपुर में बदलाव देखना चाहता हूं।
लोगों को बेहतर समाज के निर्माण लिए काम करना चाहिए। जो भटके हैं उन्हें रास्ते पर लाने की जरूरत है। इस मौके पर सदर एसडीओ आशीष नारायण, सिटी डीएसपी राजवंश सिंह, विधि व्यवस्था डीएसपी नेशार अहमद शाह, कहलगांव डीएसपी रेशु कृष्णा, ट्रैफिक डीएसपी आरके झा और सार्जेंट मेजर राम इकबाल प्रसाद यादव समेत जिले के इंस्पेक्टर व थानेदार उपस्थित थे।

