भागलपुर. भागलपुर कमिश्नरी मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर भागलपुर-साहेबगंज के बीच है लैलख स्टेशन। एनएच-80 से लैलख समेंत 5 पंचायत को जोड़ने वाली सड़क के बीच इसी स्टेशन के पास रेलवे ढाला है। ढाला के दूसरी ओर पांच पंचायतें लैलख, कुरपट, बैजलपुर, पड़घड़ी और शिवायडीह में करीब 30 हजार ग्रामीण रहते हैं।

ट्रैक के दोनों ओर सड़क बनी है, लेकिन बीच में पटरियों के कारण 15 गांवों में वाहन नहीं पहुंच पा रहे। लोगों को रेलवे ढाले के पास गाड़ी खड़ी कर पैदल ही जाना पड़ता है। लोग मरीजों को खाट पर कंधों पर उठाकर अस्पताल ले जाने को विवश हैं। दो साल में तीन मरीजों की मौत हो चुकी है।

पढ़ने वाले दो हजार बच्चे भी सुरक्षित नहीं : 15 गांवों के करीब 2000 बच्चे सबौर व भागलपुर के निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। वे रोजाना गांव से रेलवे ढाला के बाजू से पैदल रेल पटरी पार कर एनएच-80 तक पहंुचते हैं।

10 साल से हो रही मांग : समस्या दूर करने के लिए ग्रामीण करीब 10 साल से मांग कर रहे हैं। ग्रामीण अशोक ने कहा आंदोलन किए जा रहे हैं। डीएम को भी आवेदन दिया है।

3 की चली गई है जान : पटरी पार करने में देरी होती है। पूनम, सोनिया व दिव्यांग मित्तलाल ठाकुर को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, उन्होंने दम तोड़ दिया।

रास्ता बारिश में बह गया : ग्रामीण डाॅ. कुंदन, सुशांत, राजेंद्र मंडल के अनुसार, रेलवे ने एक रास्ता बनाया था। गांवों तक पहुंचने के लिए बना यह रास्ता हर बारिश में डूब जाता है।

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By न्यूज़ डेस्क

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