सितंबर माह में इस साल हुई रिकाॅर्ड तोड़ बारिश की वजह से इस बार भीषण ठंड पड़ेगी। इसका असर दिखने भी लगा है। नवंबर माह में ही सर्द हवा के चलते ठंड ने अहसास कर दिया है। न्यूनतम पारा का गिरना शुरू हाे गया है। सुबह में आर्द्रता का प्रतिशत 95 प्रतिशत से ज्यादा रहने की वजह से शहर कुहासा में लिपटना शुरू हो गया है। भागलपुर, पटना समेत कई शहरों में गुरुवार को सुबह साढ़े छह बजे से सात बजे तक विजिब्लिटी 900 मीटर के नीचे आ गई थी। पटना में विमान कंपनियों ने मौसम विभाग से कुहासे के बारे में जानकारी मांगी और इसके बाद 16 विमानों को पहले दिसंबर से 31 मार्च तक के लिए रद्द कर दिया।
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पिछले सीजन में 28 दिसंबर को पटना का न्यूनतम पारा सबसे कम 6.3 डिग्री तक गया था
इस सीजन ने भागलपुर व पटना का पारा 5 डिग्री से. से नीचे आने की उम्मीद है। यह 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच दो-तीन दिन रह सकता है। ठंड का कहर भी इसी अवधि में पड़ने की उम्मीद है।

जहां तक कुहासा लगने की बात है ताे इसी पीरियड में असर ज्यादा रहेगा।
2018 के दिसंबर माह में पटना का न्यूनतम पारा 28 दिसंबर को 6.3 था, जबकि 3 जनवरी 2019 को न्यूनतम पारा 6.6 था।
गया में पहली जनवरी 2019 को पारा 3.2 तथा 30 दिसंबर 2018 का पारा 2.7 तक गिर गया था। भागलपुर में पहली जनवरी 2019 को पारा 7.0 तथा 28 दिसंबर 2018 को 6 डिग्री था।
कुहासा और धुंध में क्या है अंतर
जब हवा में आर्द्रता का प्रतिशत 95 या इससे ज्यादा व विजिब्लिटी एक किमी से कम हो तो कुहासा और अगर विजिब्लिटी ढाई से तीन किमी और आर्द्रता 75% हो ताे वह धुंध कहा जाता है।
कश्मीर की बर्फबारी का 72 घंटे तक होता है असर पर 40 % ही
पटना मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व निदेशक एके सेन ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हुई बर्फबारी का असर भागलपुर, पटना समेत पूरे बिहार पर पड़ता है। वहां की बर्फबारी का 40 फीसदी असर बिहार पर पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है कि कश्मीर व बिहार दोनों राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से मौसम में बदलाव होता है।

