‘यंग इंडिया’, ‘युवा भारत’, ‘नया भारत’, यंगिस्तान जैसे शब्द जल्द ही बदल जायेंगे. अमेरिका के पॉपुलेशन रेफरेंस ब्यूरो (पीआरबी) के एक अध्ययन के मुताबिक, भारत में वर्ष 2050 तक 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या तीन गुना तक बढ़ जायेगी

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हमारे देश की गिनती बुजुर्ग देशों में की जाने लगेगी. अध्ययन के मुताबिक, 2050 तक भारत की जनसंख्या 170 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके तहत अगले 32 वर्षों में बच्चों की संख्या (15 साल से कम उम्र के बच्चे) 20 फीसदी कम हो जायेगी, जबकि 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या तीन गुना तक बढ़ जायेगी.

16-65 की आयु को माना जाता है कामकाजी

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में बताया था कि बुजुर्गों की आबादी 2050 तक बढ़कर 34 करोड़ पहुंचने की संभावना है. यह संख्या संयुक्त राष्ट्र के 31.68 करोड़ के अनुमान से थोड़ी अधिक है, जो यह स्पष्ट संकेत देती है कि भारत अनुमान से अधिक तेजी से बूढ़ा हो रहा है. बता दें कि अब देश में अब 16-65 की आयु को कामकाजी आबादी माना जाता है.

पिछले 10 वर्षों में 35.5 फीसदी बढ़ी बुजुर्गों की संख्या

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 2017 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या में पिछले दस वर्षो में 35.5 फीसदी की वृद्धि हुई है. 2001 में देश में बुजुर्गों की संख्या सात करोड़ 60 लाख थी जो 2011 में बढ़कर 10 करोड़ 30 लाख पहुंच गयी थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रजनन में कमी और जीवन जीने की उच्च प्रत्याशा ही देश में बुजुर्गों की जनसंख्या बढ़ाने का मुख्य कारण है.

By न्यूज़ डेस्क

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