कहलगांव जाने के समय में मैं खुद गरदामय (धूल से भरा हुआ) हो गया हूं। उसके बाद जब लौट रहा था तो पब्लिक ने रोका। वहां की स्थिति बताई। बताया कि एक भी पेड़ नहीं है जिस पर गरदा नहीं है। कोई घर नहीं बचा है इस धूल से। पब्लिक जो आ रही थी उनके शरीर पर धूल ही धूल थी। लगा की धूल का कपड़ा पहने हुए हो। इसके बाद मैंने जिलाधिकारी से फोन पर बात की। बातकर बताया कि मेरा आपसे आग्रह है कि भागलपुर-कहलगांव तक काम हो न हो पर पानी का छिड़काव होना चाहिए। फिर एनटीपीसी के जीएम से बात की। कहा अगर दो-तीन के अंदर पानी का छिड़काव नहीं होता है तो मैं धरने पर बैठूंगा। सरकार का विधायक रहते हुए मैं धरने पर बैठ जाऊंगा। ये बातें कहीं JDU विधायक गोपाल मंडल ने। उन्होंने कहा कि मैं किसी अन्य जनप्रतिनिधि की शिकायत नहीं करता हूं, लेकिन अगर सब एक्टिव हो जाएं तो विकास की गति नहीं रुकेगी।
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सड़क ऐसी की 35 किमी का सफर तय करने में लगते हैं चार घंटे
सबौर से पीरपैंती तक NH-80 पर गड्ढे व धूल के कारण कहलगांव की यात्रा इतनी आसान नहीं है। भागलपुर से कहलगांव व पीरपैंती जाने के लिए अब लाेग सड़क के रास्ते जाने की जगह ट्रेन से जाना पसंद कर रहे हैं। कारण यह है कि भागलपुर से कहलगांव की दूरी 35 किलाेमीटर तय करने में तीन से चार घंटे लग रहे हैं, जबकि ट्रेन से 30 से 40 मिनट के अंदर ही लाेग कहलगांव पहुंच जाते हैं। लोगों का कहना है कि सड़क के कारण रीढ़ की हड्डी में दर्द हो जाता है। इससे अच्छा है कि ट्रेन से सफर करना।
धूल से फूल जाती हैं सांस, खुद की नहीं पहचान पाते
कहलगांव से भागलपुर या भागलपुर से कहलगांव जाना आसान नहीं है। कहलगांव एनएच-80 की स्थिति खराब होने से काफी धूल उड़ती है। जिससे सांस लेने में तो परेशानी होती है। धूल ऐसी उड़ती है कि कुछ भी पता नहीं चलता है। पेड़, घर, दुकान सब धूल से भर जाता है। वहीं जो लोग हिम्मत कर चले भी जाते हैं वह खुद को पहचान नहीं पाते हैं। इसके कारण लोग ट्रेन की यात्रा करते हैं।

