भागलपुर में घोटाले का सृजन। यानी, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के द्वारा किए गए घोटाले का दायरा अब बहुत बड़ा होता जा रहा है। 12 घंटे की जांच में गड़बड़ी का आंकड़ा 300 करोड़ से बढ़कर 500 करोड़ हो चुका है।
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भागलपुर के अलावा अब सहरसा में भी जांच की आंच पहुंच चुकी है। मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई के सूत्रों का दावा है कि जल्द ही पूरे राज्य में घोटाले के तार फैले मिलेंगे और कुल आंकड़ा हजार करोड़ पार कर सकता है। यानी, चारा घोटाले का भी रिकार्ड टूट सकता है। घोटाले की पूरी कहानी में कई बड़े लोगों और सफेदपोशों की मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।

भागलपुर में सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड में जमा सरकारी राशि का लाभ लेने में कई नेता और अफसरों के नाम भी आ रहे हैं। अभी तक की छानबीन में यह बात सामने आई है कि सृजन के सहकारी बैंक से पटना की एक चर्चित नेत्री के खाते में करीब 15 करोड़ रुपए ट्रांसफर हुआ है। इसमें उस नेत्री की बेटी का भी नाम है। उनका आभूषण का कारोबार दिखाया गया है।
सृजन के बैंक से आरटीजीएस के माध्यम से कई कारोबारियों के खातों में भी रुपए ट्रांसफर हुए हैं। जिला मुख्यालय में पदस्थापित एक अफसर की पत्नी के नाम करीब पांच करोड़ रुपए ट्रांसफर होने के मामले की भी छानबीन हो रही है। अफसर ने पटना में पत्नी के नाम से एक बड़ा स्कूल खोला है।
इस अफसर के पूर्ववर्ती विभाग से बड़ी राशि सृजन के बैंक में जमा की गई थी। इसी तरह जिले के एक दूसरे अफसर और उनके बेटे के नाम करीब एक करोड़ रुपये ट्रांसफर होने की भी बात आ रही है। इस अफसर का बेटा मुंबई के एक बैंक में काम करता है। इस अफसर के विभाग के रुपये भी सृजन के बैंक में जमा हुए थे।
यह भी पता चला है कि शहर के एक बड़े कपड़ा दुकानदार के खाते में 30 लाख रुपए ट्रांसफर हुए लेकिन बाद में उसने सृजन को रुपये वापस कर दिया। सृजन से लाभ लेने वालों में फ्रिज, कूलर, एसी कारोबारी भी जांच के घेरे में हैं। इनका कारोबार पिछले पांच वर्षों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है।
छानबीन में नोएडा में अपार्टमेंट बनाने वाली एक कंपनी को करीब 25 करोड़ और भागलपुर के खलीफाबाग की एक अपार्टमेंट कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने की भी बात सामने आ रही है।
इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया हैं. जिनमें कई ज़िला अधिकारियों के निजी सचिव रहे प्रेम कुमार शामिल हैं। अभी तक इस मामले की जांच जिला पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई संयुक्त रूप से कर रही है और हर एक दिन इस मामले में एक नया ख़ुलासा हो रहा है। इस मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत थी और जल्द उनके अधिकारियों की गिरफ़्तारी भी होगी।

