फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च को शाम 5:57 बजे तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी, जो प्रदोष काल में प्रवेश करेगी। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है।
होलिका दहन की सही तिथि
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के मुताबिक, इस बार होलिका दहन 2 मार्च यानी आज करना सही होगा. होलिका दहन प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है. इसी वजह से 2 मार्च यानी आज शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट के बीच होलिका दहन करना उत्तम रहेगा. 3 मार्च को होलिका दहन करना उचित इसलिए नहीं होगा क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है. 4 मार्च को रंग वाली होली यानी धुलंडी खेली जाएगी.
3 मार्च को क्यों नहीं?
3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण इस दिन होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत नहीं माना जा रहा है। ग्रहण काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

रंग वाली होली कब?
रंगों की होली (धुलंडी) 4 मार्च को मनाई जाएगी।
इस प्रकार ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार 2 मार्च को होलिका दहन करना ही उचित और शुभ रहेगा।

