खरीक  : कोसी में आयी बाढ़ की चपेट में खरीक प्रखंड का दो पंचायत  लोकमानपुर और भवनपुरा के आधा दर्जन गांव की तकरीबन 20000 की आबादी  बाढ़ की चपेट में आ गई है. लोकमानपुर और भवनपुरा पंचायत चारों तरफ से बाढ़ के पानी से गिर गया है और टापू में तब्दील हो गया है .चारों तरफ बाढ़ का पानी ही पानी नजर आ रहा है. लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि इस विपरीत परिस्थिति में क्या करें ? लोग जीवन और मौत की जद्दोजहद से जूझ रहे हैं.

प्रशासनिक स्तर से आश्वासन के सिवा मदद के नाम पर एक नौका के सिवा अब तक कुछ भी नहीं मिला है. बाढ़ पीड़ित प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे है.इस उम्मीद में कि कभी तो सरकार आएंगे और हम बाढ़ पीड़ितों की मदद करेंगे. लेकिन बाढ़ पीड़ितों की आंखें मदद की आस में पथरा गई है. लेकिन प्रशासनिक सिर से बढ़ पीड़ितों को बुधवार की शाम तक किसी तरह का मदद और राहत नहीं मिल सका है. बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर से कहा जा रहा है कि बाढ़ का पानी कितने घरों में घुसा है

अभी इसका ठीक – ठीक आकलन नहीं हो सका है .सर्वे कराया जाएगा. फिलहाल सिहकुण्ड के 20 परिवार को देर शाम पॉलिथीन भिजवाया गया है.निचले इलाके में रह रहे लोगों को  ऊंचे स्तर पर ले जाया गया है. एक बड़ी नाव की व्यवस्था भी की गई है .छोटी नाव के लिए  बाढ़ पीड़ितों को कहा गया है कि वह अपने स्तर से नौका चलाएं और अंचल में लॉग बुक खुलवा ले. बाढ़ पीड़ित बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं .उसे मदद की दरकार है. बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से त्राहिमाम संदेश भेज कर मदद की गुहार लगाई है.

सिंहकुंड के 250 घरों में घुसा बाढ़ का पानी
कोसी नदी के बाढ़ से खरीक प्रखंड में भीषण तबाही मच गई है बाढ़ के पानी से उफनाई कोसी तटीय इलाकों में भीषण तबाही मचा रही है. बाढ़ के जलस्तर में लगातार उफान हो रहा है. लोकमानपुर पंचायत की सेकंड में भीषण तबाही मची है तकरीबन 250 से अधिक परिवार के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है. लोगों का चूल्हा चक्की बंद है. बीते कई दिनों से लोगों ने भोजन नहीं किया है. भूखे-प्यासे बाढ़ पीड़ित लोग खुले आसमान के नीचे ऊंचा स्थल टीले पर शरण लिए हुए है. बुधवार की शाम तक प्रशासनिक स्तर से सेकंड के बाढ़ पीड़ितों को किसी तरह की राहत नहीं मिल सकी है. लोग बुरी तरीके से बाढ़ में फंसे हुए गांव से निकलने के लिए नाव की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. एक तोले से दूसरे डोले में अपने परिजनों को बचाने के लिए नौका की व्यवस्था नहीं है. लोग तैरकर जान बचा रहे हैं. माल मवेशी के लिए चारा का प्रबंध नहीं है. मवेशी चारा के अभाव में दम तोड़ने की कगार पर है. बुरे फंसे हैं बाढ़ पीड़ित.
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By Rishav Mishra Krishna

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