ढोलबज्जा: नवगछिया प्रखंड के कोसी पार, कदवा के विभिन्न सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को अब तक छात्रवृत्ति व पोशाक की राशि नहीं मिल पाई है. जबकि सभी विद्यालय के प्रभारियों द्वारा करीब 5 माह पूर्व यानी मई महीने में ही राशि का आवंटन यूको बैंक ढोलबज्जा को कर दी गई है. जहां बैंक मैनेजर की मनमानी रवैया के कारण आधे से अधिक स्कूली बच्चों को अपना छात्रवृत्ति व पोशाक की राशि नसीब नहीं हो पा रही है. मवि कासिमपुर के विद्यालय प्रभारी दिगंबर राय, प्रावि गोला टोला प्रभारी डिंपल कुमारी, मवि लोकमानपुर प्रभारी रामदेव रजाक व प्रावि बोड़वा टोला प्रभारी प्रतिमा कुमारी ने बताई की 8-10 बजे ही ऐसे हैं, जिसके खाते में गड़बड़ी है.
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बाकी सभी छात्र-छात्राओं का खाता ठीक है. फिर भी बैंक मैनेजर की लापरवाही के कारण आधे से अधिक बच्चों को राशि नहीं मिल पाई है. किसी-किसी छात्र-छात्राओं के खाते पर तो दुबारा-तिबारा भी पैसे भेज दिए जाते हैं. मवि कासिमपुर की छात्रा आसनी कुमारी, निधि व स्वाति कुमारी ने बताई बैंक कर्मी से विद्यालय प्रभारी को प्राप्त सूची के अनुसार मेरे खाते पर पैसे भेज दिए गए हैं, जब अपना खाता चेक करते हैं तो जीरो बैलेंस बताता है. ऐसे कई मामले मेरे विद्यालय में है. उक्त सभी बातों को लेकर जब बच्चे यूको बैंक ढोलबज्जा पहुंचते हैं तो, वहां के बैंक मैनेजर यह कहकर अपना पल्ला झाड़ देते हैं कि जाकर अपने प्रभारी से मिलो. वह सही से बच्चे का सूची नहीं देते हैं.

इस बात को लेकर, जब विद्यालय के प्रभारी जाते हैं तो बैंक मैनेजर उल्टे गरम होकर डांट फटकार लगाते हुए, खाते में गड़बड़ी व स्टाफ की कमी बता कर टाल देते हैं. जब कोई प्रभारी अपने बच्चों के प्रति ज्यादा उत्सुकता दिखाते हुए गर्म होते हैं तब शांत होकर बैंक कर्मी 2 से 3 दिन में सभी के खाते पर पैसे भेजने की बात करके वापस भेज देते हैं. लेकिन बाद में भी पैसे नहीं भेजते. विद्यालय प्रभारी डिंपल कुमारी ने बतायी दो दिन पहले भी बच्चों के छात्रवृत्ति व पोषाक की राशि को लेकर गया था, जहां बैंककर्मी गौरव कुमार ने कहा दो से तीन दिन में सभी बच्चों के खाते पर पैसे भेज दिए जायेंगे. वहीं कदवा के दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि अभी खेती-बाडी का समय है.
हम लोग यूको बैंक ढोलबज्जा के ग्राहक हैं. जब कभी भी बैंक के कामकाज से वहां जाते हैं तो, ऐसे लगता है जैसे बैंक मैनेजर का मानसिक संतुलन बिगड़ गया हो. किसी भी तरह का कोई बात पूछे जाने पर आग की तरह बबूले हो जाते हैं. बार-बार अनुरोध करने पर गरम होकर यहां से अपना खाता ले जाने को कहते हैं. वहां सिर्फ अपने खास लोगों का ही चलता है. जो तुरंत आते हैं और मैनेजर के केविन में घुस अपना काम करके निकल जाते हैं. हमलोग मुंह ही देखते घंटों बैंक में खड़े रह जाते हैं. ऐसे बैंक कर्मी को यदि यहां से हटाया नहीं गया तो, एक दिन हम लोग चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने पर उतारु हो जाऊंगा.

