नवगछिया । गंगा स्नान के दौरान डूबे चार किशोरों में आलोक और शिवम अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। दोनों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आलोक के शव पर उसकी मां सुनीता देवी, बड़ी बहन काजल और छोटी बहन कंचन दहाड़ मारकर रो रही थी। पिता संतोष भगत ठेला पर दुकान चलाकर रोजी रोटी चलाते थे। बूढ़ी दादी रो-रोकर कहती थी गंगा नहैले गल्हो हो बेटा गनगलाभ हो गल्हो हो। वहीं इकलौते शिवम की मौत पर ममता देवी और पिता दिगम्बर शर्मा का भी रो-रोकर बुरा हाल था। मां बेटे के शव को देखकर बुत बन गई थी।
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बहने कह रहीं थीं कि अब किसको बांधूंगी राखी
अपने इकलौते भाई आलोक के शव को देखकर बहन काजल और कंचन फूट-फूटकर कर रोए जा रही थीं और कह रही थीं कि अब किसके कलाई पर बांधूगी राखी। बड़ी बहन काजल की शादी एक साल पहले हुई थी जनकी छोटी कंचन की शादी होने वाली थी।
शव पर रोते-रोते बेहोश हो रही थी मां
पुत्र सोनू का शव घर पर आते ही मां मुन्नी देवी दौड़कर अपने बेटे के शव से लिपटकर दहाड़ मारकर रोने लगी। बहन दीपा और मनीषा का भी रो-रोकर बुरा हाल था। सोनू इंटर स्तरीय बिद्यालय में 11 वीं का छात्र था।

अनुमंडल अस्पताल में मचा कोहराम
सोमवार को नारायणपुर के चार और तिनटंगा में गंगा में डूबे मधेपुरा के युवक के शवों के आने से परिजनों के चीत्कार से अस्पताल गूंज रहा था। चारो ओर मृतकों के परिजनों की चीख पुकार गूंज रही थी।
