गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का टोटा, महिलाओं ने खोला मोर्चा

गोपालपुर (भागलपुर)। भागलपुर जिले के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र के नवटोलिया गांव की जनता आजादी के 77 साल बाद भी पक्की सड़क से वंचित है। करीब छह किलोमीटर लंबा रास्ता अब भी कच्चा है। बारिश और बाढ़ के समय हालात इतने खराब हो जाते हैं कि गांव तक एंबुलेंस या कोई वाहन नहीं पहुंच पाता। नतीजा— कई मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं।


नवगछिया न्यूज़ WhatsApp Group

गांव वालों का कहना है कि 2005 से लगातार इस क्षेत्र से जेडीयू के गोपाल मंडल विधायक हैं, लेकिन आज तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ। अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही ग्रामीणों, खासकर महिलाओं ने प्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका साफ कहना है कि “जब तक सड़क नहीं, तब तक वोट नहीं।”


 

इलाज के अभाव में मौतें

गांव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी मौत का कारण बन रही है। बीमार मरीज को कंधे पर लादकर खटिया से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। अस्पताल गांव से आठ किलोमीटर दूर है। समय पर इलाज न मिलने से कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया।

मौत के मामले:

  1. शामलाल मंडल (2024) – पेट दर्द, समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके।

  2. शिव मंडल (2024) – सीने में दर्द, इलाज न मिलने से मौत।

  3. अस्मिता कुमारी (2024) – प्रसव के दौरान समय पर इलाज नहीं, दर्द से मौत।

  4. विपिन मंडल की बेटी (मार्च 2025) – डिलीवरी केस, देरी से अस्पताल पहुंचने पर जान गई।

  5. बिस्वल मंडल की बेटी (जुलाई 2025) – 15 माह की बच्ची, इलाज न मिलने से मौत।

  6. विलक्षणी देवी (जुलाई 2025) – लकवा से दम तोड़ा।

  7. दीपनारायण मंडल (फरवरी 2025) – हार्ट अटैक, इलाज मिलने से पहले मौत।

  8. नीला मंडल (अगस्त 2025) – बीमारी से समय पर इलाज न होने से मौत।

  9. मौची मंडल की पत्नी (2025) – शुगर और ब्लड प्रेशर बढ़ने से रास्ते में ही दम तोड़ा।


ग्रामीणों का आक्रोश

वार्ड सदस्य अजय मंडल कहते हैं, “सड़क नहीं होने से मरीज को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी चुनौती है। कई लोग इलाज के अभाव में मर गए हैं, लेकिन किसी प्रतिनिधि ने सुध नहीं ली।”

आशा कार्यकर्ता सुदामा देवी बताती हैं, “यहां बाइक वाला भी आने से डरता है। गर्भवती महिला की हालत बिगड़ जाए तो खेत या घर में ही प्रसव कराना पड़ता है। यह बेहद खतरनाक है।”


महिलाओं का दो टूक एलान

गांव की महिलाएं सबसे आगे हैं। उनका कहना है कि इस बार वे वोट का बहिष्कार करेंगी। ग्रामीण नारे लगा रहे हैं—
“सड़क नहीं तो वोट नहीं।”

गांव की महिलाएं एसडीओ कार्यालय का घेराव करने और अपनी मांग रखने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि प्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के वक्त आते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की सुध नहीं लेते।


विधायक से संपर्क नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार जेडीयू विधायक गोपाल मंडल को लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बार ग्रामीणों का गुस्सा चुनाव में देखने को मिलेगा।

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Kulisbet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Kulisbet
Kulisbet giriş
Kulisbet güncel giriş
kralbet
Dinamobet
Dinamobet
Madridbet
Dinamobet
Dinamobet
Kulisbet
Matbet
Matbet