नवगछिया। सड़क हादसे में घायल दिलीप यादव की नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में मौत के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और पुलिस प्रशासन दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद दिलीप की स्थिति स्थिर थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद लगभग आधे घंटे तक कोई उपचार नहीं दिया गया। परिजनों के अनुसार, बार-बार आग्रह के बाद केवल रक्तचाप मापा गया, लेकिन समय रहते इलाज शुरू नहीं किया गया। जैसे-जैसे दिलीप की हालत बिगड़ती गई, उन्हें भागलपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के गार्ड ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें घायल मरीज से मिलने तक नहीं दिया। यह बात सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। इसी दौरान मौके पर उपस्थित चिकित्सक वहां से हट गए, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। विवाद बढ़ने पर अस्पताल प्रशासन ने नवगछिया थाना को सूचना दी।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस को तुरंत सूचना देने के बावजूद, पोस्टमार्टम इंक्वेस्ट के लिए पुलिस लगभग दो घंटे की देरी से अस्पताल पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद भी पुलिस को खबर दी गई थी, लेकिन मौके पर पुलिस लगभग चार घंटे बाद पहुंची, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दुर्घटना करने वाला कार चालक नशे की हालत में था और घटना के बाद कार छोड़कर फरार हो गया।

इस मामले में नवगछिया यातायात थाना प्रभारी सुजीत वारसी ने कहा कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा, जहां पोस्टमार्टम पूरा करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि अब तक परिजनों की ओर से कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है। आवेदन मिलते ही मामला दर्ज किया जाएगा। थानेदार ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस समय पर ही पहुंची थी, जबकि ग्रामीण और परिजन देरी का आरोप लगा रहे हैं। मौके से संबंधित गाड़ी को जब्त कर लिया गया है और चालक फरार है।
दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने भी अपना पक्ष रखा है। अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पिंकेश कुमार ने कहा कि दिलीप यादव को घायल अवस्था में लाया गया था और मौजूद डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार किया था, जिसके बाद उनकी स्थिति देखते हुए उन्हें रेफर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जाएगी। यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में अस्पताल की कार्यशैली और पुलिस की देरी को लेकर भारी नाराजगी है। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उपचार और प्रशासनिक कार्रवाई होती, तो शायद दिलीप की जान बचाई जा सकती थी।

